कविता खत्म हो गई

#Gaurilankesh ko समर्पित।

ए चलो अब सो जाओ,
कविता खत्म हो गई ।

खुली आँखों से दिखायी नही देता उसे अब
पलकें झपकतीं नजर नही आ रही अब
लो कविता तो खत्म हो गई ।

कविता का जुर्म क्या है?
जो पड़ी है औंधे मुँह एक ओर
गोलियों से छलनी, कटी-पिटी सी यूँ ।
उस पर ये प्रश्न चिन्ह है
कि वह निहायत ही व्यंग है
फूहड़ है, गंदी है, बदचलन है
और उलटी-पुलटी बातें करती है
फिर भी उसमे अदम्य एक साहस है
जो उसे कविता बनाती है,
उसकी लाज तो रखते, हम।
लेकिन कविता तो खत्म हो गई, एक बार फिर।

कविता ने हमेशा, मुझसे बातें की,,
डर, उसमें कभी था ही नही।
वह निडर, निस्वार्थ, लोगों के लिए थी
उसकी कल्पनाशीलता में हजारों तत्व छिपे थे।
जो दुष्टता को पराजित कर सकते थे,
पर कविता तो खत्म हो गई, सचमुच की।
अब,,,,,,,,,,?

#अभिनय

16 Comments

  1. C.M. Sharma babucm 12/09/2017
    • अभिनय शुक्ला अभिनय शुक्ला 12/09/2017
  2. shivdutt 12/09/2017
    • अभिनय शुक्ला अभिनय शुक्ला 12/09/2017
  3. Bindeshwar prasad sharma Bindeshwar Prasad sharma 12/09/2017
    • अभिनय शुक्ला अभिनय शुक्ला 12/09/2017
  4. डी. के. निवातिया डी. के. निवातिया 12/09/2017
    • अभिनय शुक्ला अभिनय शुक्ला 12/09/2017
  5. डी. के. निवातिया डी. के. निवातिया 12/09/2017
    • अभिनय शुक्ला अभिनय शुक्ला 12/09/2017
  6. Madhu tiwari Madhu tiwari 12/09/2017
    • अभिनय शुक्ला अभिनय शुक्ला 12/09/2017
  7. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 13/09/2017
    • अभिनय शुक्ला अभिनय शुक्ला 14/09/2017
    • अभिनय शुक्ला अभिनय शुक्ला 14/09/2017

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