भीगीं आँखे,,,

भींगी आँखे
सिसकती होठों के फरियाद को
दुखा कर परस्पर चला
जो देखा करती थी राह कभी
उन ख़्वाबो को रुलाकर क्या मिला

 

खुद फ़रियादी हुआ करता था कभी
दर गुजर कर किसी के राह पर
माना कि आज मुकल्लम है तु
पर किसी के फ़रियाद को
ठुकरा कर क्या मिला

 

खुद के सिसकती आँखों को
ना देखा तूने कभी
आज उनके आँसूओं पर
मुस्कुरा कर क्या मिला

 

होकर यु मासूम तेरे दर पर से
जा रहा है कोई
आज किस्मत का ठुकराया हूँ मैं
जब किसी को आस न दिया
तो क़िस्मत की गठरी लेकर क्या मिला

✍✍✍✍मु.जबेर हुसैन

14 Comments

  1. C.M. Sharma babucm 12/09/2017
    • md. juber husain md. juber husain 04/10/2017
  2. shivdutt 12/09/2017
    • md. juber husain md. juber husain 04/10/2017
  3. Bindeshwar prasad sharma Bindeshwar Prasad sharma 12/09/2017
    • md. juber husain md. juber husain 04/10/2017
  4. डी. के. निवातिया डी. के. निवातिया 12/09/2017
    • md. juber husain md. juber husain 04/10/2017
    • md. juber husain md. juber husain 04/10/2017
  5. Madhu tiwari Madhu tiwari 12/09/2017
    • md. juber husain md. juber husain 04/10/2017
  6. Ram Gopal Sankhla Ram Gopal Sankhla 13/09/2017
    • md. juber husain md. juber husain 04/10/2017

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