सवाल क्यों हैं,,,?

सवाल क्यों हैं ?
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मेरी जिंदगी की सहर से
आपको मलाल क्यों हैं ?

 

लबो पे तेरी हँसी झलक रही है
पर आँखों में गुमनाम सा सवाल क्यों हैं ?

 

हर वक़्त सोचता हूँ कि दूर जाऊ आपसे
आपकी याद आते ही मैं कहाँ को निकल जाता हूँ

 

ताकि भूल जाऊ आपको
इतनी नफ़रत होते हुए भी मेरे दिल में
आपके लिए सम्मान क्यों हैं ?

 

आपके होठों में झलक रही है हँसी
पर आँखों में गुमनाम सा सवाल क्यों हैं ?

 

हर एक गम-ए-दास्ता को भूले क्यों नही “जुबेर”
वो आँधी आए तो बरसों हो गए
मगर तेरे लिए फ़िलहाल क्यों हैं ?

 

आपके लबो पे झलक रही है हँसी
पर आँखों में गुमनाम सा सवाल क्यों हैं ?

 

खूब अदा की आपकी ख़ुशीयों के हर्ष-गम को
खूब ख़ुशीयाँ बरसाई सबके निगाह ने

 

फुलते आलम से देखा कि काँच में गुलाब क्यों हैं ?
इन गुलाब की खुशबू मदहोश सा नशा क्यों हैं ?

 

सबने कहा कि रंगीन है ये दुनिया
पर मेरी निगाह ने देखा की फिका सा गुलाब क्यों हैं?

 

लबो पे हँसी झलक रही है
पर आँखों में सवाल क्यों हैं ?

✍✍✍मु. जुबेर हुसैन

5 Comments

  1. C.M. Sharma babucm 11/09/2017
  2. डी. के. निवातिया डी. के. निवातिया 11/09/2017
  3. kiran kapur gulati kiran kapur gulati 11/09/2017
  4. Madhu tiwari Madhu tiwari 11/09/2017
  5. shivdutt 13/09/2017

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