फूलों की पाठशाला

खुली पाठशाला फूलों की

पुस्तक-कॉपी लिए हाथ में

फूल धूप की बस में आए

 

कुर्ते में जँचते गुलाब तो

टाई लटकाए पलाश हैं,

चंपा चुस्त पज़ामें में है –

हैट लगाए अमलताश है ।

 

सूरजमुखी मुखर है ज़्यादा

किंतु मोंगरा अभी मौन है,

चपल चमेली है स्लेक्स में

पहचानों तो कौन-कौन है ।

 

गेंदा नज़र नहीं आता है

जुही कहीं छिपाकर बैठी है,

जाने किसने छेड़ दिया है –

ग़ुलमोहर ऐंठी-ऐंठी है ।

 

सबके अपने अलग रंग हैं

सब हैं अपनी गंध लुटाए,

फूल धूप की बस में आए –

मुस्कानों के बैग सजाए ।

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