एै ज़िन्दगी तेरे चेहरे हजा़र

किरन कपूर गुलाटी
एै ज़िन्दगी तेरे चेहरे हज़ार

हँसाए कभी तो
 कभी रुलाये ज़ार ज़ार


समझना तुझे आसान नहीं
कहीं होती है रुखसत

तो कहीं लाती है बहार

दिखाती है कभी

वीराणिओ के आसार
तूफानों से भी कभी

कराती है पार


एै जि़न्दगी तेरे चेहरे हज़ार

दे देती है कभी अश्क़ बेशुमार
लुटती है कभी प्यार ही प्यार

रह जाती हैं कभी हसरते कई
आता नहीं फिर ज़िन्दगी में खुमार
खेते रहते हैं कश्ती कि उतरेंगे पार

ले जाती है कहीं और
 उमंगों की धार

हो जाता है खड़ा
 कभी बेडा मंझधार

और खेने को
 नहीं मिलता पतवार

एै ज़िन्दगी तेरे चेहरे हज़ार

बीते पलों  पर
 न था इख़्तियार

आने वाले पलों का
 रहता इन्तिज़ार
बीत जाता है जीवन हो जैसी बहार
नहीं आता कभी
 जीवन में करार
रहे तमन्नाओं से
 कभी दिल गुलज़ार
और खिलाये फूल
 फिर वो बेशुमार

एै जि़न्दगी तेरे चेहरे हजा़र

यह चाहतों राहतों का है बाजा़र

फिर भी चैन नहीं होता शुमार
बहारों का हर पल रहता इन्तिज़ार
पलों ही पलों में खो जाता संसार

एै ज़िन्दगी तेरे चेहरे हज़ार


हँसाए कभी तो कभी रुलाये ज़ार ज़ार

14 Comments

  1. Bindeshwar prasad sharma Bindeshwar Prasad sharma 08/09/2017
  2. kiran kapur gulati kiran kapur gulati 08/09/2017
    • kiran kapur gulati kiran kapur gulati 08/09/2017
  3. डी. के. निवातिया डी. के. निवातिया 08/09/2017
    • kiran kapur gulati kiran kapur gulati 08/09/2017
  4. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 08/09/2017
    • kiran kapur gulati kiran kapur gulati 08/09/2017
  5. Madhu tiwari Madhu tiwari 08/09/2017
    • kiran kapur gulati kiran kapur gulati 08/09/2017
  6. ANU MAHESHWARI ANU MAHESHWARI 08/09/2017
  7. kiran kapur gulati kiran kapur gulati 09/09/2017
  8. C.M. Sharma babucm 09/09/2017
  9. kiran kapur gulati kiran kapur gulati 09/09/2017

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