कलम अकेली …….

चलों बात करते है
यूँ तो बहोत है बताने को
वक्त शायद कम है
फुरसत कहा सुनाने को

उंगली चल रही है
बटन दब रही कहने को
अल्फाज तैर रहे है
वक्त नही समझने को

कोई तो लिख रहा है
कुछ तो शायद जताने को
पढ़ना मुश्किल है
वक्त न आंख टिकाने को

कलम चल रही है
दूर तक साथ ले जाने को
मगर साथ कौन है
कलम अकेली निभाने को
——————//**–
शशिकांत शांडिले, नागपुर
भ्र.९९७५९९५४५०

20 Comments

  1. C.M. Sharma babucm 08/09/2017
    • शशिकांत शांडिले shashikant shandile 08/09/2017
  2. kiran kapur gulati kiran kapur gulati 08/09/2017
  3. डी. के. निवातिया डी. के. निवातिया 08/09/2017
  4. Bindeshwar prasad sharma Bindeshwar Prasad sharma 08/09/2017
  5. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 08/09/2017
  6. Madhu tiwari Madhu tiwari 08/09/2017
  7. ANU MAHESHWARI ANU MAHESHWARI 08/09/2017
  8. md. juber husain md juber husain 10/09/2017
  9. md. juber husain md juber husain 10/09/2017

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