सवेरा – बिन्देश्वर प्रसाद शर्मा (बिन्दु)

कब से सोये हो
कब तक सोयेगा
अरे, अब तो जागो
सवेरा तेरा इंतज़ार कर रहा।

नींद में कब तक रहोगे
खोये खोये कब तक ढहोगे
क्या कर्म तुझे याद नहीं
आगे बढ़, मंजिल तुझे पुकार रही।

जिंदगी खराब क्यों कर रहे
पानी को शाराब क्यों कर रहे
जीवन विषाक्त मत होने दो
अहंकार क्यों तुझे घिक्कार रहा।

कुछ करने की मन में ठानो
दुनिया क्या है इसको जानो
आलस को अब दूर भगा दो
तेरा नसीब ,तुझे ललकार रहा।

8 Comments

  1. डी. के. निवातिया डी. के. निवातिया 07/09/2017
  2. शशिकांत शांडिले shashikant shandile 07/09/2017
  3. C.M. Sharma babucm 08/09/2017
  4. kiran kapur gulati kiran kapur gulati 08/09/2017
  5. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 08/09/2017
  6. Madhu tiwari Madhu tiwari 08/09/2017
  7. md. juber husain md juber husain 10/09/2017

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