कविता:– हस्ती मिटा ली , कवि ~~ अमन नैन

उड़ती चिड़िया से दिल लगा बैठे
खुले आसमान को अपना समझ बैठे
दुनिया से परे अपना अलग
आसियाना बनाने की सोचने लगे
जज्बातो पर नही रहा काबू
उड़ते अरमानो को हवा दे बैठे
अब आखो से आंसू ना रोक पा रहे
उसके हुस्न के जाल में फस कर
अपना सब कुछ लुटा दिया
समाज से रहकर दूर
आपने में ही खुश रहने लगे गया
कोई अपना सा नही रहा
सब लगने लगे पराये पराये
अन्धेरो को अपना साथी बन लिया
गमो के आंचल में जिंदगी गुजार रहे
मौत का इंतजार बड़ा सता
आपने नाम की हस्ती को
अमन ने मिटटी में मिला लिया

10 Comments

  1. डी. के. निवातिया डी. के. निवातिया 04/09/2017
    • Aman Nain Aman Nain 04/09/2017
  2. Madhu tiwari Madhu tiwari 04/09/2017
    • Aman Nain Aman Nain 05/09/2017
  3. chandramohan kisku chandramohan kisku 04/09/2017
    • Aman Nain Aman Nain 05/09/2017
  4. Bindeshwar prasad sharma Bindeshwar Prasad sharma 04/09/2017
    • Aman Nain Aman Nain 05/09/2017
  5. Aman Nain Aman Nain 05/09/2017

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