तरुवर छाया कहीं मिल जाती है…सी. एम्. शर्मा (बब्बू)…

मंद मंद चलती समीर, यूं तेरे बालों को लहराती है….
जैसे मस्त बदली कोई, चाँद को चूम चूम जाती है…

सुप्त इश्क़ का अंकुर, उर में हलचल करता है…
मतवारे नैनों से जब तू, मय छलकाती जाती है…

खिल जाऊं कमल जैसे, मन शैशव हो जाए है…
अधीर हुए होंठों को जब तू, मदिरा पिला जाती है….

ना मैं चतुर बनिक सा, ना नट सा कलाकार हूँ…
चाकर हो जाता हूँ जब, मृगनयनी आँखें मटकाती है…

प्रीत लगा के तुमसे, मन “चन्दर” अब आराम से है…
जैसे तपती रूह को तरुवर छाया कहीं मिल जाती है…
\
/सी. एम्. शर्मा (बब्बू)

16 Comments

  1. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 04/09/2017
    • C.M. Sharma babucm 05/09/2017
    • C.M. Sharma babucm 05/09/2017
  2. डी. के. निवातिया डी. के. निवातिया 04/09/2017
    • C.M. Sharma babucm 05/09/2017
  3. ANU MAHESHWARI ANU MAHESHWARI 04/09/2017
    • C.M. Sharma babucm 05/09/2017
  4. Madhu tiwari Madhu tiwari 04/09/2017
    • C.M. Sharma babucm 05/09/2017
  5. Bindeshwar prasad sharma Bindeshwar Prasad sharma 04/09/2017
    • C.M. Sharma babucm 05/09/2017
  6. kiran kapur gulati kiran kapur gulati 05/09/2017
    • C.M. Sharma babucm 05/09/2017
  7. Meena Bhardwaj Meena Bhardwaj 05/09/2017
    • C.M. Sharma babucm 07/09/2017

Leave a Reply