यादें

यादें
kiran kapur gulati किरन कपूर गुलाटी
चलते चलते थम से गए

पेड़ों की छाँव में

पांव ठिठक कर रह गए

यादों के गाँव में

कदम भी मद्धम हो गए

रफ़्तार अपनी छोड़ कर

इक इक नज़ारा याद आया

बढ़ते हुए हर मोड़ पर

याद आया फिर वोः बालपन

दिल वोःपुरसुकून सा

बचपन की कुछ सहेलियां

कुछ यौवन की मस्त पहेलियाँ

आयी याद खिलन वोः धूप की

और जाड्डे की सर्द रातें भी

पंख लगाये उड़ता था मन

हल्का हो बादलों की तरह

न सीमाओं का ही बोध था

न थीं कोई पाबंदियां

सुहाना था बहुत
वोः बचपन का आलम

बेफिक्र मन
खिलखिलाने का आलम

ताज़ा हैं वोः यादें आज भी

जैसे कल की ही तो बात हो

छिटकी हुई सी चांदनी
और तारों भरी वोः रात हो

16 Comments

  1. Meena Bhardwaj Meena Bhardwaj 03/09/2017
    • kiran kapur gulati kiran kapur gulati 03/09/2017
  2. md. juber husain md juber 03/09/2017
    • kiran kapur gulati kiran kapur gulati 03/09/2017
  3. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 03/09/2017
  4. kiran kapur gulati kiran kapur gulati 03/09/2017
    • kiran kapur gulati kiran kapur gulati 04/09/2017
  5. ANU MAHESHWARI ANU MAHESHWARI 04/09/2017
    • kiran kapur gulati kiran kapur gulati 04/09/2017
  6. Madhu tiwari Madhu tiwari 04/09/2017
    • kiran kapur gulati kiran kapur gulati 04/09/2017
  7. Bindeshwar prasad sharma Bindeshwar Prasad sharma 04/09/2017
  8. kiran kapur gulati kiran kapur gulati 04/09/2017
  9. डी. के. निवातिया डी. के. निवातिया 05/09/2017
  10. C.M. Sharma babucm 05/09/2017

Leave a Reply