राम राज़ की ओट में — डी के निवातिया

राम राज़ की ओट में

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राम राज़ की ओट में, पनपे रावण राज।
जनसेवक राजन बने , गर्दन काटे आज ।
गर्दन काटे आज , वचन बोले कर मीठे।
बुराई पर मौन रख, भाषण सुनावे तीखे ।
जो  बने अंध भक्त, बिठा लिये गोद में
दुष्ट रहे फल फूल, राम राज की ओट में ।।

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डी के निवातिया

14 Comments

  1. Madhu tiwari Madhu tiwari 31/08/2017
    • डी. के. निवातिया डी. के. निवातिया 21/09/2017
  2. Rajeev Gupta Rajeev Gupta 31/08/2017
    • डी. के. निवातिया डी. के. निवातिया 21/09/2017
  3. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 31/08/2017
    • डी. के. निवातिया डी. के. निवातिया 21/09/2017
  4. ANU MAHESHWARI ANU MAHESHWARI 01/09/2017
    • डी. के. निवातिया डी. के. निवातिया 21/09/2017
  5. C.M. Sharma babucm 01/09/2017
    • डी. के. निवातिया डी. के. निवातिया 21/09/2017
    • डी. के. निवातिया डी. के. निवातिया 21/09/2017
  6. Meena Bhardwaj Meena Bhardwaj 01/09/2017
    • डी. के. निवातिया डी. के. निवातिया 21/09/2017

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