तीर निज दिल पे झेले हैं -शिशिर मधुकर

मुहब्बत के मैंने जीवन में जो भी खेल खेले हैं
हार हिस्से में आई है और अब फिर से अकेले हैं

दर्द सहने की शक्ति जब किसी की बढ़ती जाती है
समझ लो ऐसे इंसा ने तीर निज दिल पे झेले हैं

जानते हैं वो भी ये राज़ इश्क़ में कुछ न मिलता है
गगरिया प्रेम की गैरों पे मगर फिर भी उड़ेले हैं

ज़िन्दगी बीत जाती है सज़ा पूरी ना होती है
जुर्म ए उल्फ़त में आशिक को यहाँ मिलती वो जेलें हैं

कभी रहते नहीं आबाद मधुकर एक जगह पर जो
मुहब्बत स्वार्थ भरे जीवन के बस कुछ ऐसे मेले हैं

शिशिर मधुकर

18 Comments

  1. नवल पाल प्रभाकर naval pal parbhakar 31/08/2017
    • Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 31/08/2017
  2. C.M. Sharma babucm 31/08/2017
    • Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 31/08/2017
  3. Madhu tiwari Madhu tiwari 31/08/2017
    • Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 31/08/2017
  4. डी. के. निवातिया डी. के. निवातिया 31/08/2017
    • Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 31/08/2017
  5. Rajeev Gupta Rajeev Gupta 31/08/2017
    • Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 31/08/2017
  6. Vikram jajbaati Vikram jajbaati 31/08/2017
    • Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 31/08/2017
  7. ANU MAHESHWARI ANU MAHESHWARI 01/09/2017
    • Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 01/09/2017
    • Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 01/09/2017
  8. Meena Bhardwaj Meena Bhardwaj 01/09/2017
    • Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 02/09/2017

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