जरुरत से बनते और बिगड़ते है रिश्ते – अनु महेश्वरी

जरुरत से बनते और बिगड़ते है, रिश्ते जहाँ,
ऐसी दुनिया में कैसे मिले, सुकून किसीको यहाँ?

न अपना कोई सगा यहाँ,
न ही कोई है बेगाना यहाँ,
बस मतलब की दुनिया है सारी,
रिश्तों पे भी पड़ता है स्वार्थ भारी,
जरुरत से बनते और बिगड़ते है, रिश्ते जहाँ,
ऐसी दुनिया में कैसे मिले, सुकून किसीको यहाँ?

न ही सच दिखता है यहाँ,
न ही झूठ टिकता है यहाँ,
बस सुविधा के हिसाब से बोला जाता,
कभी झूठ तो कभी सच यह बन जाता,
सच और झूठ का पैमाना, बदलता रहता जहाँ,
ऐसी दुनिया में कैसे मिले, सुकून किसीको यहाँ?

जरुरत से बनते और बिगड़ते है, रिश्ते जहाँ,
ऐसी दुनिया में कैसे मिले, सुकून किसीको यहाँ?

 

अनु महेश्वरी
चेन्नई

16 Comments

  1. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 30/08/2017
    • ANU MAHESHWARI ANU MAHESHWARI 01/09/2017
  2. Bindeshwar prasad sharma Bindeshwar Prasad sharma 30/08/2017
    • ANU MAHESHWARI ANU MAHESHWARI 01/09/2017
  3. डी. के. निवातिया डी. के. निवातिया 30/08/2017
    • ANU MAHESHWARI ANU MAHESHWARI 01/09/2017
  4. C.M. Sharma babucm 31/08/2017
    • ANU MAHESHWARI ANU MAHESHWARI 01/09/2017
  5. Madhu tiwari Madhu tiwari 31/08/2017
    • ANU MAHESHWARI ANU MAHESHWARI 01/09/2017
  6. Rajeev Gupta Rajeev Gupta 31/08/2017
    • ANU MAHESHWARI ANU MAHESHWARI 01/09/2017
    • ANU MAHESHWARI ANU MAHESHWARI 04/09/2017
  7. Meena Bhardwaj Meena Bhardwaj 01/09/2017
    • ANU MAHESHWARI ANU MAHESHWARI 04/09/2017

Leave a Reply