ऐ इंसान संभल जा तू…..

शीर्षक-
जाने क्यों डरता है तू
कैसी चाहत रखता है तू
खुदा की बनायीं सबसे
नायाब जान है तू
तू मत घबरा
ऐ इंसान
कितना भोला है तू
बाबाओं के झमेला में पड़ा है तू
आस्था के गोरखधंधे को समझा ना तू
तू क्यों लुटाता अपनी कमाई दौलत
तू क्यों लुटा देता अपनों की अस्मत
तू राम में आस्था रख
आशाराम में नहीं
तू खुद के अन्दर के राम को देख
किसी ढोंगी राम-रहीम को नहीं
तू खुद अपना खुदा है
तेरा भगवान् तेरे अन्दर है
कोई रामपाल नहीं
ऐ इंसान
कितना भोला है तू
पाखंडियो के लिए जान लुटाने चला है तू
उन्हें भगवान् बनाने चला है तू
गीता ने कर्म करना
सिखलाया तुझे
कुरान ने खुदी पे भरोसा करना सिखलाया तुझे
तू रह निडर
तू बन निडर
ऐ इंसान संभल जा तू
गर अब भी नहीं संभला
खुद को गवां देगा
खुदा ना ढूंड पायेगा
इन मुल्ला- मौलवी के चक्कर में
इन बाबाओं के चक्कर मे
तू अपनों को गवायेगा
अपनों का खून बहाएगा
ऐ इंसान
ऊपर बैठा खुदा या भगवान्
तुझे माफ़ नहीं कर पायेगा

5 Comments

  1. C.M. Sharma babucm 29/08/2017
    • Abhishek Rajhans 29/08/2017
      • C.M. Sharma babucm 30/08/2017
  2. Sukhmangal Singh sukhmangal singh 29/08/2017
  3. Madhu tiwari Madhu tiwari 29/08/2017

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