माँ की बेटी

आज लिखी मेरी नयी रचना जिसे लिखते समय मैं अपने आंसुओ को बहने से ना रोक पाया

शीर्षक–माँ की बेटी

माँ
ओ मेरी माँ
सुनो ना मुझे
महसूस करो ना मुझे
मैं तेरी उदर में हूँ समाहित
मैं जानती हूँ
तुम नहीं चाह सकती मेरा अहित
मुझे अपने गोद में आ जाने दो ना
माँ
मेरी प्यारी माँ
खिल जाने दो ना अपने बाग में
थाम लो ना मेरी उँगलियाँ
मुझे दुलारों ना पुचकारो ना
मुझे पढ़ लेने दो ना
थोडा मचलने दो ना
मुझे मुस्कराने दो ना माँ
ओं माँ — मेरी प्यारी माँ
क्योँ डरती हो माँ
मुझे जन्म देने से
क्यों डरती हो
मेरे होने से
माँ — ओं माँ
मैं तेरे सपनो को जिउंगी
तेरे पंखो से परवाज करुँगी
तेरा बचपन तुम्हे दिखाउंगी
तुम्हारा योवन मैं बन जाउंगी
माँ— ओं माँ
मेरी प्यारी माँ
तुम क्यों डरती ज़माने से
तुम क्यों डरती मुझे अपनाने से
जैसे तुम आई
मुझे भी आने दो ना
मेरा परिचय करवाओ ना
माँ —ओ माँ
मेरी प्यारी माँ
तुम हार गयी माँ
अपने कोख में मुझे
तुम मार गयी माँ
तुम क्यों नहीं लड़ी माँ
मुझे आने देती माँ
मुझे जीने देती माँ
मुझे बनने तो देती
मेरी बेटी की माँ
मुझे बनने तो देती
अपने माँ की बेटी——-अभिषेक राजहंस

8 Comments

  1. Rajeev Gupta Rajeev Gupta 26/08/2017
  2. sudarshan41 26/08/2017
    • Abhishek Rajhans 26/08/2017
    • Abhishek Rajhans 26/08/2017
  3. ANU MAHESHWARI ANU MAHESHWARI 27/08/2017
  4. C.M. Sharma babucm 28/08/2017
  5. डी. के. निवातिया डी. के. निवातिया 28/08/2017

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