तुम जो होती

शीर्षक-तुम जो होती
मेरी जिंदगी में
तुम जो होती
साथ साथ सपनो को जीते
साथ साथ अरमान पूरे करते
तुम मेरी साँसों में जीती
मैं तुम्हारे सपनो को जीता
जब कभी मैं रुक जाता
मंजिल की ओर जाते जाते
तुम मेरा हौसला बढ़ाती
तुम मेरा हिम्मत बन जाती
तुम जो होती
मैं ना रुकता कभी
मैं ना झुकता कभी
ना उदासी का आलम होता
ना मायूसी का सितम होता
आँखों में नींद होती
नींद में ख्वाब आते
तेरे -मेरे जज्बात होते
तुम जो होती
मेरी सुबह
तुम्हे निहारने से होता
मेरी नींद
तेरी पायल की झंकार से टूटती
मेरी बाहें तेरा सिरहाना होता
मेरे दिल का तुझमे ठिकाना होता
तुम जो होती
हर दर्द को जी लेता
तुम मरहम बन
मेरे दर्द पे लग जाती
अपनी तस्वीर
मेरे सीने में लगा जाती—-अभिषेक राजहंस

6 Comments

  1. C.M. Sharma babucm 26/08/2017
  2. डी. के. निवातिया डी. के. निवातिया 26/08/2017
    • Abhishek Rajhans 26/08/2017
  3. Madhu tiwari Madhu tiwari 26/08/2017
  4. ANU MAHESHWARI ANU MAHESHWARI 27/08/2017

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