हम सब बच्चे एक बाग़ लगाते हैं… Raquim Ali

भाग -1

दस बच्चों का खेल-खेल में
एक बनाया गोला
सोनू ने चिल्ला-चिल्ला कर
सब बच्चों से यूं बोला-

‘चलो छोटू, चलो मोटू
चलो मंटू, चलो संटू
चलो चिंटू, चलो मिंटू
चलो टुन्ना, चलो टुन्नी
चलो मुन्ना, चलो मुन्नी

चलो,
छोटे- छोटे पौधे लेने
हम मार्केट में जाते हैं
चलो मिल-जुल कर
हम सब बच्चे
एक बाग़ लगाते हैं।’

छोटू से टुन्नी तक एक साथ बोले-
‘बड़े-बड़े खेत अब कहाँ हैं?
हम बाग़ कहाँ पर लगाएंगे?
बोलो सोनू,
हम जमीन कहाँ पर पाएंगे?’

सोनू सोच में पड़ गया, फिर मुन्ना बोला-
‘चलो टेरेस पर ही सही
चलो, रूफ पर ही सही
एक खेत बनाते हैं
एक छोटा ही सही
चलो मिल-जुल कर
हम सब बच्चे
एक बाग़ लगाते हैं।’

मुन्नी:
‘चलो, मम्मी-पापा के संग
नर्सरी में हम जाते हैं
चलो कुछ बीज लाते हैं
चलो कुछ सीडलिंग्स लाते हैं
चलो कुछ कम्पोस्ट बनाते हैं
चलो मिल-जुल कर
हम सब बच्चे
एक बाग़ लगाते हैं।’

सभी बच्चे:
‘चलो मम्मी-पापा को
हम अपना प्लान बताते हैं
चलो टेरेस पर ही सही
चलो रूफ पर ही सही
एक छोटा ही सही
चलो मिल-जुल कर
हम सब बच्चे
एक बाग़ लगाते हैं।’
****  *****
(चंद महीनों के बाद):
सभी बच्चों के बालकनी में
सभी बच्चों के छतों पर
छोटे-छोटे गमले लगे हुए हैं
किसी के बालकनी पर, बोतलों में
किसी के छत पर टोकरियों में
हरे-भरे, रंग-बिरंगे फूल टंगे हुए हैं।

किसी के छत पर
फूलों के टावर बने हुए हैं
किसी के छत पर
आम, अनार, नीबू
कटहल, पपीता, चीकू
के बोनसाई सजे हुए हैं।
कुछ बच्चों के छत पर
अब हाईड्रोपोनिक्स, एक्वापोनिक्स,
एरोपोनिक्स विधियों से उपज रही
बिना मृदा के ही
तरह-तरह की सब्जियां
भी लहरा रही हैं
जो मन को बहुत भा रही हैं।
**** *****
(कुछ साल बाद):

अब छुट्टियों में
बच्चे दूर के, पार्क में नहीं जाते हैं
एक दूसरे के बालकनी पर, छतों पर
घूम-घूम कर पिकनिक मनाते हैं
खूब मस्ती करते हैं, खूब धूम मचाते हैं
पौधों को, फूलों को वे खूब निहारते हैं
नन्हें-नन्हें  हाथों से उनको सहलाते हैं।
*****  ****** **** ****** ****** ****  *****
भाग-2

सभी
इंसानों के बाबा, आदम
पहले जन्नत, यानी कि
बाग़ में ही रहा करते थे
वे जन्नत को कभी
छोड़ना नहीं चाहते थे-
वे कैसे छोड़ सकते थे?
****
तब से गुजरता रहा
एक ज़माने से दूसरा
फिर ज़माने पर ज़माना;
गार्डेन का आदमी से रिश्ता
आदमी का गार्डेन से रिश्ता
बहुत क़दीम है, यानी है बहुत पुराना।

बाबा आदम के ज़माने से
हेरेडेट्री तौर पर
लोगों में बग़ीचे से लगाव है
यानी कि अनुवांशिक तौर पर
लोगों का बग़ीचे से जुड़ाव है।

लोगों में एक ललक है
इसीलिए वे बाग़ लगाते हैं
लौटने का मन नहीं करता है-
जब बाग़ में
एक बार वे चले जाते हैं।
…र.अ. bsnl

8 Comments

  1. डी. के. निवातिया डी. के. निवातिया 23/08/2017
  2. Madhu tiwari Madhu tiwari 23/08/2017
  3. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 23/08/2017
  4. C.M. Sharma babucm 24/08/2017
  5. ANU MAHESHWARI ANU MAHESHWARI 24/08/2017
  6. raquimali raquimali 24/08/2017

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