घर लौट आऊंगा

शीर्षक– घर लौट आऊंगा
माँ मेरी कुछ अरसे से परेशान सी है
अपने स्नेह की चादर ओढाने
वो दर्द के धूप में भी
गीता सी कुरान सी है
माँ को डर है
उसका बेटा ओस की बूंदों की
तरह उड़ ना जाए
सोहरत पाने की लालच में
कही उससे मुहं ना मोड़ जाए
उसे मेरे दूर होने का
डर लगता है
दूनिया की भीड़ में मुझे खोने का
डर लगता है
माँ को नहीं पता
उसकी लोरी से बेहतर
कोई गीत नहीं
उसके बिना मेरे जीवन में
कोई संगीत नहीं
माँ मेरी तू नंदनी सी
मैं तेरा नन्दलाल हमेशा रहूँगा
धुप की तपिश को सहकर
कुंदन सा चमक जाऊँगा
मैं हवा का झोंका बन
तुझ तक पहुँच जाऊँगा
माँ मैं एक दिन अपनी
नयी पहचान बनाऊंगा
मुझे जन्म देने का
मान दे जाऊँगा
ख़ाक में मिलकर भी
मैं तेरी खुशबू बचा जाऊँगा
माँ मैं एक दिन
घर लौट आऊंगा—– अभिषेक राजहंस

10 Comments

  1. Madhu tiwari Madhu tiwari 21/08/2017
    • Abhishek Rajhans 22/08/2017
  2. C.M. Sharma babucm 21/08/2017
    • Abhishek Rajhans 22/08/2017
  3. Bindeshwar prasad sharma Bindeshwar Prasad sharma 22/08/2017
    • Abhishek Rajhans 22/08/2017
  4. kiran kapur gulati kiran kapur gulati 22/08/2017
  5. Kajalsoni 22/08/2017

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