फहराएंगे कल तिरंगा आराम से

हाकिम का नया क़ायदा है रहिये आराम से,
गुनहगार अब पकडे जायेंगे नाम से,

हाकिम को पता है उसकी बेगुनाही,
वो तो सजावार है उसके नाम से,

उसका सर झुका रहा कायदों की किताब के सामने,
हाकिम को चिढ़ है उस किताब के नाम से,

जो जंग-ऐ- आजादी से बनाए रहे दूरियां,
फहराएंगे कल तिरंगा आराम से,

अरुण कान्त शुक्ला, 14 अगस्त 2017

6 Comments

  1. kiran kapur gulati kiran kapur gulati 17/08/2017
  2. C.M. Sharma babucm 17/08/2017
  3. Vikram jajbaati Vikram jajbaati 17/08/2017
  4. डी. के. निवातिया डी. के. निवातिया 17/08/2017
  5. Kajalsoni 17/08/2017
  6. Madhu tiwari madhu tiwari 18/08/2017

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