अपना देश – डी के निवातिया

अपना देश

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अलग अलग है भाषा अपनी, अलग अलग है वेश
राम चन्द्र जी जहाँ धरे थे, सन्यासी का भेष
बहें प्रेम की गंगा जमुना, आपस मे है प्रेम
नहीं मिलेगी धरती ऐसी, जैसा अपना देश ||

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*डी के निवातियाँ*

यह रचना *सरसी छंद* पर रचित है । इसका मात्रिक आधार 16, 11 मात्राओं पर निर्भर, अंत मे गुरु लघु अनिवार्य।

16 Comments

  1. kiran kapur gulati kiran kapur gulati 17/08/2017
    • डी. के. निवातिया डी. के. निवातिया 25/08/2017
  2. C.M. Sharma babucm 17/08/2017
    • डी. के. निवातिया डी. के. निवातिया 25/08/2017
  3. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 17/08/2017
    • डी. के. निवातिया डी. के. निवातिया 25/08/2017
  4. Vikram jajbaati Vikram jajbaati 17/08/2017
    • डी. के. निवातिया डी. के. निवातिया 25/08/2017
  5. Meena Bhardwaj Meena Bhardwaj 17/08/2017
    • डी. के. निवातिया डी. के. निवातिया 25/08/2017
  6. Kajalsoni 17/08/2017
    • डी. के. निवातिया डी. के. निवातिया 25/08/2017
    • डी. के. निवातिया डी. के. निवातिया 25/08/2017
  7. Madhu tiwari madhu tiwari 18/08/2017
    • डी. के. निवातिया डी. के. निवातिया 25/08/2017

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