कैसी आजादी चाहिए

मेरी नयी कविता–
शीर्षक–कैसी आजादी चाहिए
आज हमारे देश में
हर किसी को आजादी चाहिए
आजादी के रंग में जो रंगा नहीं
जिसे आजादी का मतलब पता नहीं
वो भला क्या समझेगा
लहू बहाना क्या होता है
देश की खातिर
जान लुटाना क्या होता है
मिटटी की खातिर
मिटटी में मिल जाना क्या होता है
माँ की मर्यादा
पिता का गौरव
सब भुला कर
हमें तो बस आज़ादी चाहिए
घरो में दीवारे चाहिए
मुल्ला ,पंडित या पादरी
मंदिर , मस्जिद गुरूद्वारे चाहिए
धरम के नाम पर बंटवारे चाहिए
इस मुल्क को ना जाने
कितने हुक्मरान चाहिए
सीमाओं पर हमें और कितने
बेटो के प्राण चाहिए
ये तेरा वो मेरा में
एक दूजे की जान चाहिए
जाने कैसी आजादी चाहिए
जाने कैसा हिंदुस्तान चाहिए—-अभिषेक राजहंस

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