तेरा इंतज़ार

शीर्षक- तेरा इंतज़ार है
ये जो समंदर के जिस्म पर
लहरें मचलती हैं
अठखेलियाँ करती हैं
मैं किनारे बैठा महसूस करता हूँ
तेरी याद में समंदर बना फिरता हूँ
ये जो लहरें मचल-मचल के
भींगाते हैं मुझे
तेरी छुअन का एहसास दिलाते हैं
अगन बढ़ाते हैं
ये जो समंदर के किनारे
रेत होते है
इन रेतों में तुम्हारी मूरत बनाता हूँ
बदहवास सा तुम्हारा इंतज़ार करता हूँ
तेरी याद में लहरों को देखा करता हूँ
तुम आती हो लहर बनकर
अपनी सूरत रेत से मिटाने
मुझे तडपाने
मेरा इंतज़ार बढ़ाने
ये कौन सी तुम्हारी नाराज़गी है
ये कैसी वफ़ा निभाती हो
मुझे अंधेरा करके
कैसी रौशनी फैलाती हो
क्यों तुम चाँद कहलाती हो
मत भूलो
उस चाँद में भी दाग है
कैसा तुम्हारा राग हैं
तुम्हारा ये चाँद तो बेदाग़ हैं–अभिषेक राजहंस

2 Comments

  1. Madhu tiwari Madhu tiwari 13/08/2017
    • Abhishek Rajhans 13/08/2017

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