रस्सी को क्या मालूम

रस्सी को क्या मालूम

रस्सी को नहीं मालूम
कि वो कहां बंधेगी
किस खूंटे में गाय को थामेगी?
उसे तो यह भी
नहीं मालूम कि
किस अलगनी में
टंगेगी तन कर।
उसे तो यह भी नहीं पता
कि किस झंड़े को आसमान तक पहुंचाएगी,
किस छप्पर में तनेगी।
रस्सी को क्या मालूम
कि किसके गले में अटकेगी,
कौन इस पार से
उस पार चला जाएगा।
मालूम ही हो जाता तो क्या कर लेती
बेचारी रस्सी,
न विरोध कर पाती
न उसकी सुनी जाती,
सुनने वाला तो चला गया,
रह गई रस्सी।

7 Comments

  1. angel yadav Anjali yadav 11/08/2017
  2. डी. के. निवातिया डी. के. निवातिया 11/08/2017
  3. Madhu tiwari Madhu tiwari 11/08/2017
  4. ANU MAHESHWARI ANU MAHESHWARI 12/08/2017
  5. Kajalsoni 12/08/2017
  6. C.M. Sharma babucm 12/08/2017

Leave a Reply