सच्चे हिंदुस्तानी

जहाँ सूरज की रौशनी नहीं
जहाँ होती नहीं प्राणवायु
खून जम जाए
जहाँ हिमखंडो से टकराकर
जहाँ प्यास है पर पानी नहीं
वहीँ रहते है सच्चे हिंदुस्तानी
भारत के वीर सेनानी
हम ताज़ी हवाओं के लिए
शिमला -मनाली की वादियों में घूमते हैं
हम पार्टियों का जुगाड़ करते हैं
हम प्यार करते है
व्यापार करते हैं
मखमली गद्दों पर लेटकर
नींद की तलाश करते हैं
जहाँ ज़िन्दगी की आस टूट जाए
अपनों का साथ छुट जाए
जहाँ जिंदगी बर्फ में दब जाए
जहाँ हवा का नामोनिशान नहीं
वो वहां भी परवाज करते हैं
जान हथेली पर रखकर
हमारी जीत का आगाज़ करते हैं
वो है सच्चे हिंदुस्तानी
भारत के वीर सेनानी
हम हर सुबह अपने
ऑफिस की ओर जाते हैं
वो हर रोज मौत के करतब
दिखा रहे होते हैं
तिरंगे में लिपट कर
अपने घरो को लौट रहे होते है
वो जाग रहे होते हैं
हम सो रहे होते हैं
क्योकिं
वो सच्चे हिंदुस्तानी होते है
भारत के वीर सेनानी होते हैं— अभिषेक राजहंस

7 Comments

  1. Madhu tiwari Madhu tiwari 10/08/2017
    • Madhu tiwari Madhu tiwari 10/08/2017
  2. kiran kapur gulati kiran kapur gulati 11/08/2017
  3. babucm babucm 11/08/2017
  4. डी. के. निवातिया डी. के. निवातिया 11/08/2017
  5. Kajalsoni 11/08/2017

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