मेरा अकेला मन

जब मन अकेला होता है ,
एक हवा पूछ कर जाती है .
क्यों खोई सी तुम रहती हो .
क्यों मन पर बोझ डालती हो
जब मन अकेला होता है.
चुपके चुपके कुछ कहता है .
क्यों बेचैन सी तुम रहती हो
क्यों खुद से तुम डरती हो.
जब मन अकेला होता है ,
मेरे कलम की स्याही कहती है ,
बेजान सी हू मै फिर भी
क्यों मुझसे सब तुम कहती हो
क्या रिस्ता मेरा तुमसे है ,
मुझसे अपने दर्द बांटती हो .
जब मन अकेला होता है ,
यु गुमसुम गुमसुम रहता है ,
जब सपनो की झड़ी सजती हो ,
तब दुनिया को भूल जाती हो ,
तब खुद में ही मुस्काती हो
मुस्काते ही मुस्काते पीछे ,
क्यों हट जाती हो .
जब मन गुमसुम रहता है तो,
खुद से प्रश्न पूछता है ,
क्या कुछ हांसिल कर पाओगी ,
तब हंसकर मै कहती हूँ
रिस्तो की डोर नहीं छोडूंगी ,
हर पालो को संजो कर रखूंगी .
हांसिल कर प्यार अपने हिस्से का
खुद में ही जीत जाउंगी .
हर घडी सोचता रहता है मन ,
फिर भी गुमसुम सा रहता है ये मन …..
                           गुमसुम गुमसुम रहता है मन…..

                                                                    Anjali yadav (KGMU)

17 Comments

  1. babucm babucm 10/08/2017
    • angel yadav anjali yadav 10/08/2017
  2. Bindeshwar prasad sharma Bindeshwar Prasad sharma 10/08/2017
    • angel yadav anjali yadav 12/08/2017
  3. Madhu tiwari Madhu tiwari 10/08/2017
    • angel yadav anjali yadav 12/08/2017
  4. kiran kapur gulati kiran kapur gulati 11/08/2017
    • angel yadav anjali yadav 12/08/2017
  5. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 11/08/2017
    • angel yadav anjali yadav 12/08/2017
    • angel yadav anjali yadav 12/08/2017
  6. डी. के. निवातिया डी. के. निवातिया 11/08/2017
    • angel yadav anjali yadav 12/08/2017
  7. Kajalsoni 11/08/2017
    • angel yadav anjali yadav 12/08/2017
  8. angel yadav anjali yadav 12/08/2017

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