अहो जान अहो प्रीतम प्यारे – मनुराज वार्ष्णेय

अहो जान अहो प्रीतम प्यारे
मुझको हो तुम सबसे न्यारे
चाँद में तो धब्बे बहुत सारे
पर तुम हो आंखों के तारे

अहो जान अहो प्रीतम प्यारे
यू तो है लाखों में तारे
पर तुम जैसे नही है सारे
तुम तो हो मेरे ध्रुव तारे

 

कवि – मनुराज वार्ष्णेय

5 Comments

  1. Madhu tiwari Madhu tiwari 09/08/2017
  2. C.M. Sharma babucm 10/08/2017

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