ऐ मेरे प्यार – मनुराज वार्ष्णेय

मेरी जान-ए-तमन्ना तुमको कैसे दूर हम कर दे
सजाये दिल ने जो सपने तो कैसे चूर हम कर दे
कई शब के अंधेरों में तुम्ही ने दिल को समझाया
बनी हो तुम खुदा दिल की तो कैसे दूर हम कर दे

जो मैंने खाई थी कसमें उन्ही पे चलता जाऊंगा
तेरे मेरे प्यार के किस्से मैं दुनिया भर में गाऊंगा
नही कमजोर समझना तू मुझे ए मेरे जानम
चुनौती तोड़के सारी तेरी महफ़िल सजाऊँगा

 

कवि – मनुराज वार्ष्णेय

 

 

8 Comments

  1. Madhu tiwari madhu tiwari 06/08/2017
  2. C.M. Sharma babucm 06/08/2017
  3. Bindeshwar prasad sharma Bindeshwar Prasad sharma 06/08/2017
  4. Kajalsoni 09/08/2017

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