मेरी मोहब्बत को तुम सार दे गए – मनुराज वार्ष्णेय

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मेरी मोहब्बत को तुम सार दे गए
जिसकी कमी थी मुझको वो प्यार दे गए
नैनों में जो राज अब तक छुपे थे
देकर मोहब्बत वो इनको पार कर गए
तेरी ही यादें ही याद रहती मुझको
जैसे महकता कोई गुलजार दे गए
बंदिशें जमाने की सारी हमने जीती थी
छीन के दिल को वो हमको हार दे गए
मेरे गीत गजलों को ऐसा रूप दे गए
छेड़ी ऐसी धुन कि बस बेकरारी दे गए

कवि – मनुराज वार्ष्णेय

5 Comments

  1. kiran kapur gulati kiran kapur gulati 04/08/2017
  2. Sukhmangal Singh sukhmangal singh 05/08/2017
  3. C.M. Sharma babucm 05/08/2017
  4. डी. के. निवातिया डी. के. निवातिया 05/08/2017
  5. Madhu tiwari madhu tiwari 06/08/2017

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