मेरा जीवन पूरा तूने

 मेरा  जीवन  पूरा  तूने

 

मेरे  पुण्य कर्म को  तूने

पापों की श्रेणी में रखकर

और मधुरवाणी को  मेरी

कटुता का ही भेद बताकर

 

मेरा  जीवन  पूरा  तूने

दूषित रंगों में मथ डाला

 

अब साँसें ही  मचल रही हैं

तज पंखों को  उड़ जाने को

और नीड़  में  बैठी  श्रद्वा

बस व्याकुल है कुछ पाने को

 

पर तूने  श्रद्वा  सुमनों को

भक्ति विमुख ही कर डाला

मेरा   जीवन   पूरा  तूने

दूषित  रंगों में  मथ डाला

 

तन ही  मेरा शेष बचा है

ज्यों इक सीपी रेत पड़ी हो

और  लहर के  आते-जाते

लुढ़क लुढ़ककर टूट पड़ी हो

 

तूने  तो  जीवन आशा को

पलभर में खंड़ित कर डाला

मेरा   जीवन   पूरा  तूने

दूषित रंगों में  मथ  डाला

 

सोचा था  तेरे  हाथों में

पतवार  हमारी जब होगी

आँधी भी नन्हीं बाला-सी

तेरी  गोदी  सोती  होगी

 

पर  तूने  तो  तूफानों  को

कुछ और भयंकर कर डाला

मेरा   जीवन   पूरा   तूने

दूषित  रंगों में  मथ  डाला

 

प्राणहीन कर  मेरे मन को

अंतः से  ही झकझोर दिया

सूखी डाली-सा कर मुझको

ईंधन बनने बस छोड़ दिया

 

और धधकती चिता सजाकर

नष्ट देह को भी कर डाला

मेरा   जीवन   पूरा   तूने

दूषित  रंगों में  मथ  डाला

 

फिर भी हूँ मैं अस्थि-कलश-सा

कुछ  फूलों से  सजा  हुआ हूँ

और  समर्पण  चाह  लिये बस

तेरे  चरणों   पड़ा   हुआ हूँ

 

उठा सके तू दया भाव से

सब वैसा मैंने  कर डाला

मेरा  जीवन   पूरा  तूने

दूषित रंगों में  मथ डाला

                       … भूपेन्द्र कुमार दवे

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6 Comments

  1. chandramohan kisku chandramohan kisku 31/07/2017
  2. Bindeshwar prasad sharma Bindeshwar Prasad sharma 31/07/2017
  3. kiran kapur gulati kiran kapur gulati 01/08/2017
  4. C.M. Sharma babucm 01/08/2017
  5. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 01/08/2017
  6. डी. के. निवातिया डी. के. निवातिया 01/08/2017

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