मेवा घनी बई काबुल में

मेवा घनी बई काबुल में, बिंदराबन आनि करील लगाए
राधिका सी सुरबाम बिहाइ कै, कूबरी संग सनेह रचाए।

मेवा तजी दुरजोधन की, बिदुराइन के घर छोकल खाए।
‘ठाकुर ठाकुर की का कहौं, सदा ठाकुर बावरे होतहिं आए॥

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