आपकी निगाहें

ख़ामोशी से भरी
आपकी जो ये निगाहे है
समंदर सी जो इसमें गहराई है
खिडकियों के झरोखे से
जो मैं इन्हें देखता हूँ
देखता बस देखता रहता हूँ
ये जो रात होती है
इन रातो में हमारी आपसे बात होती है
कभी इधर कभी उधर
हमारी नजरो की मुलाकात होती है
दिल की दिल से बात होती है
आपकी जो ये निगाहे हैं
ना जाने
कितने इनमे जज्बात होते है
ये तो इश्क्बाज़ होते हैं
इन निगाहों में
खुद को खोजने की कोशिश में
मेरे नजरो में सैलाब होते हैं
मेरी आँखों से बरसात होते हैं
अभिषेक राजहंस

7 Comments

  1. Madhu tiwari madhu tiwari 30/07/2017
  2. C.M. Sharma babucm 31/07/2017
  3. kiran kapur gulati kiran kapur gulati 31/07/2017
  4. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 31/07/2017
  5. डी. के. निवातिया डी. के. निवातिया 31/07/2017
  6. Bindeshwar prasad sharma Bindeshwar Prasad sharma 31/07/2017

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