यही तो बिहार है

ये जो बिहार है
राजनीति का कैसा यहाँ आकार है
यहाँ के मुख्यमंत्री नितीश कुमार है
कभी इन्हें लालटेन से प्यार है
कभी इन्हें हाथ का साथ पसंद है
कभी ये कमल की खुशबु के लिए बेकरार है
अम्मा ये भी कोई प्यार है
अरे भाई यही तो नितीश कुमार है
व्यर्थ का जनता का इनसे प्यार है
अरे काहे इन्हें इतना अधिकार है
चलिए जो भी हो
अब करियेगा का भैया
चुनाव अभी समन्दर पार है
यही तो बिहार है
चार साल के बाद सुशील का
सत्ता से फिर करार है
लालू का तो बंटाधार है
हाथ बेचारा पॉकेट में छिपने
को लाचार है
तीर के वार से सब तार-तार है
अरे भैया
यही तो बिहार है
जनता है मालिक
जनता को सब याद है
चाहे भूल गए लालू या सुशिल
या भूले नितीश कुमार है
कुर्सी से इतना काहे सब को प्यार है
इन्हें जीताना
जब जनता का अधिकार है
यही तो बिहार है
यही तो बिहार है—-
– अभिषेक राजहंस

युवा कवि एवं लेखक

2 Comments

  1. Madhu tiwari madhu tiwari 30/07/2017
  2. C.M. Sharma babucm 31/07/2017

Leave a Reply