बदल गये – बिन्देश्वर प्रसाद शर्मा ( बिन्दु )

धरती बदली और न चांद बदला

सूरज वही है, न आसमान बदला।

बदल गए हम, आप और वो

लालच में न जाने क्यों इंसान बदला।

नीयति बदल गयी हमारी, इंसाफ बदला

सभ्यता और संस्कृति का हिसाब बदला।

बदल गयी हमारी नजरें बिस्वास बदला

हवा, अग्नि, जल, कुछ भी न बदले

नदिया, सागर, झरने, पहाड़ न बदले।

काटकर बदले  हम दरख्त और पहाड़

काटकर बदल दिये जंगल और झाड।

जिसे संवारना था, गला काट दिया

आदमी इस तरह संस्कार बांट दिया।

उलझन मे आ गये हम,   बिचार बदला

समस्याएं जटिल हुई, ब्याभिचार बदला।

प्राकृत की शृंगार बदली, वक्त बदला

न हम बदले न अपना अहंकार बदला।

बदल दो अपनी आदतें, ये झूठी दिखावा

ले आओ प्यार, मीठी मुस्कान, पहनावा।

 

 

14 Comments

  1. C.M. Sharma babucm 27/07/2017
    • Bindeshwar prasad sharma Bindeshwar Prasad sharma 29/07/2017
  2. डी. के. निवातिया डी. के. निवातिया 27/07/2017
    • Bindeshwar prasad sharma Bindeshwar Prasad sharma 29/07/2017
  3. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 28/07/2017
    • Bindeshwar prasad sharma Bindeshwar Prasad sharma 29/07/2017
    • Bindeshwar prasad sharma Bindeshwar Prasad sharma 29/07/2017
  4. Sukhbir95 29/07/2017
    • Bindeshwar prasad sharma Bindeshwar Prasad sharma 29/07/2017
  5. ANU MAHESHWARI ANU MAHESHWARI 31/07/2017
    • Bindeshwar prasad sharma Bindeshwar Prasad sharma 01/08/2017
  6. Sukhmangal Singh sukhmangal singh 02/08/2017
    • Bindeshwar prasad sharma Bindeshwar Prasad sharma 02/08/2017

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