तेरा मेरा साथ

शीर्षक- तेरा मेरा साथ
बीतता जीवन तेरे संग
तुझसे है मेरे जीवन में रंग
याद आ रहा
आज अरसे बाद
वो मुलाकातों का दौर
नज़रे छुपाती जिया चुराती
आती थी मेरे संग
भरने मेरे जीवन में रंग
वो भी क्या पल थे
तुम मेरी साँसों में हर पल थी
सिर्फ तुम थी और मैं था
साथ में बगीचे का कोना
जहाँ हमें था छुपे-छुपाये मिलना
तुम्हे याद है ना
जब हो गयी तेरी मेरी सगाई
तुम कितनी थी शरमाई
मैं भी खुश था
तुम्हे अपनी ज़िन्दगी मान कर
तुम्हे अपनी सांसो की रखवाली देकर
बीतते वक़्त के संग बीत रही ज़िन्दगी
उन जादुई लम्हों को आज भी याद करता हूँ
वक़्त के थपेड़ो के संग बहते-बहते
ना मुझे कभी तुम्हे निहारने का वक़्त रहा
ना तुम्हे मेरे होने का इल्म रहा
मैं ऑफिस के कामो में उलझा रहा
तुम भी घर सँभालने में उलझी रही
हर शनिवार तुम्हे घुमाना चाहता
तेरे संग बैठना चाहता
तेरे संग बतियाना चाहता
पर मन मसोस कर रह जाता
कुछ बढती उम्र का असर था
कुछ बढ़ते बच्चो का फिकर था
पर मैं खुश था की
तुम मेरे साथ कल भी थी
आज भी हो
और कल भी रहोगी
चाहे टूट जाए मेरी साँसे
पर ना टूटे
तेरा–मेरा साथ
हाथो में हो तेरा हाथ—-अभिषेक राजहंस

4 Comments

  1. C.M. Sharma babucm 27/07/2017
    • Abhishek Rajhans 27/07/2017
  2. डी. के. निवातिया डी. के. निवातिया 27/07/2017
  3. Bindeshwar prasad sharma Bindeshwar Prasad sharma 27/07/2017

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