राख…(पियुष राज)

राख
धन दौलत के अभिमान में
इंसान हो जाता है मगरूर
अपने आप को बड़ा समझकर
अपनो से ही हो जाता है दूर

मरने के बाद धन-दौलत
सब कुछ हो जाता है खाक
अंत मे जिंदगी की हकीकत को बताता है
शमसान में पड़ा वह #राख

जब वो मिट्टी के चूल्हे में
माँ गरम गरम रोटियां बनाती थी
उस रोटी का स्वाद हमारे
दिल को छू जाती थी

अब वो मिट्टी का चूल्हा
घरों में नहीं है जलता
चूल्हे से निकलते थे जो राख
अब देखने को नहीं है मिलता
पियुष राज
दुमका ,झारखण्ड
P71

5 Comments

  1. arun kumar jha arun kumar jha 26/07/2017
  2. C.M. Sharma babucm 27/07/2017
  3. डी. के. निवातिया डी. के. निवातिया 27/07/2017
  4. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 29/07/2017
  5. Madhu tiwari madhu tiwari 31/07/2017

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