ज्योतिर्लिंग – बी पी शर्मा ( बिन्दु )

रावण तो एक बहाना था

बाबा को देवघर आना था।

वह उनका ही  दीवाना था

पर शर्त लगा कर जाना था ।

राजी चलने को हो गए झट

पर रास न आया उनका हठ ।

ध्यान इस से उनका हटाना था

जब कैलाश से लंका लाना था ।

पार्वती जी, सखी गंगा से बोली

रोको अब तुम, रावण की डोली ।

बस, गंगा उदर में उतर आई

अपनी गरिमा को खुद पाई।

लघुशंका मन मे जाग गया

जो देखा उनको भाग गया।

पर ग्वाला बैजू डटा रहा

देख उनको ऐसे थटा रहा।

रावण को उस पर आस लगी

दोस्ती फिर उस पर जाग गई।

समझाया गोद मे डाल दिया

उदर की गंगा निकाल दिया।

जब रावण आया तो देखा

धरती पर इनको था फ़ेका।

शर्त रावण ने ही हारा था

दबा अंगूठा इनको टारा था।

यह ज्योतिर्लिंग शिव शंकर हैं

यहां कंकर कंकर भी शंकर हैं।

 

 

 

 

 

10 Comments

  1. babucm babucm 26/07/2017
    • Bindeshwar prasad sharma Bindeshwar Prasad sharma 29/07/2017
  2. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 26/07/2017
    • Bindeshwar prasad sharma Bindeshwar Prasad sharma 29/07/2017
  3. Madhu tiwari madhu tiwari 26/07/2017
    • Bindeshwar prasad sharma Bindeshwar Prasad sharma 26/07/2017
  4. डी. के. निवातिया डी. के. निवातिया 26/07/2017
    • Bindeshwar prasad sharma Bindeshwar Prasad sharma 26/07/2017
  5. arun kumar jha arun kumar jha 26/07/2017
    • Bindeshwar prasad sharma Bindeshwar Prasad sharma 29/07/2017

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