बंधन (एक दर्द का)

दर्द उस पंछी का ,
जो उड़ न सका ,
पंख होते हुए भी ,
आसमान को छू न सका .
जमी पर अपने एक ,
साथी से पूंछता है ,
हजारो सपने इस ,
आसमान को लेकर सजाये है,
पर आँखों से कभी ,
ये जता न सका .
अपने फड़पड़ाते पंखो से ,
हमेसा कोशिश की ,
लेकिन चाह कर भी ,
अपने इन पंखो को फैला न सका.
फिर से अपने आपको ,
इसी जमीन पर पाते है ,
और अपना ये दर्द किसी को ,
जता न  सका ..

anjali yadav

( kgmu lko )

5 Comments

  1. डी. के. निवातिया डी. के. निवातिया 25/07/2017
  2. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 26/07/2017
  3. babucm babucm 26/07/2017
  4. Anderyas Anderyas 26/07/2017
  5. arun kumar jha arun kumar jha 26/07/2017

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