मौलीक अधिकार – अनु महेश्वरी

अपने अधिकारो में फंसे हम ऐसे,
सामने वाले का अधिकार भूल बैठे,
किसी बात पे, शर्म नहीं आती, आज हमे,
सारी बाते, लगती मौलीक अधिकार, हमे|

बेमतलब की वहस में सब,
हम समय गवाने लगे है अब,
शक्ति अब कही खोने लगी है,
शोर बस ज्यादा, होने लगा है|

परिवार सिमट गया फेसबुक में,
रिश्तेदार अब दूर होने लगे है,
समय बिते इंटरनेट और मोबाइल पे,
नज़र भी कमज़ोर होने लगी है|

शिक्षा आज बनी है व्यापार,
भूलने लगे है, अपने संस्कार,
बन बैठा पैसो का गुलाम, इंसान,
खोने लगा है, आज उसका ईमान|

 

अनु महेश्वरी
चेन्नई

10 Comments

  1. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 24/07/2017
    • ANU MAHESHWARI ANU MAHESHWARI 24/07/2017
  2. C.M. Sharma babucm 25/07/2017
    • ANU MAHESHWARI ANU MAHESHWARI 03/08/2017
  3. डी. के. निवातिया डी. के. निवातिया 25/07/2017
    • ANU MAHESHWARI ANU MAHESHWARI 03/08/2017
  4. arun kumar jha arun kumar jha 26/07/2017
    • ANU MAHESHWARI ANU MAHESHWARI 03/08/2017
  5. arun kumar jha arun kumar jha 26/07/2017
    • ANU MAHESHWARI ANU MAHESHWARI 03/08/2017

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