हम अकेले थे

कोई न था माँ ,
हम अकेले थे .
बहुत बड़ी थी ये दुनिया ,
फिर भी हम अकेले थे .

कोई हाँथ मेरा पकड़ कर ,
न चला ,
सारे रास्तो की दूरिया ,
अकेले तय करते चला ..

सब हसंते थे तो ,
हम भी हँसते थे ,
एक तेरी हंसी के बिना ,
माँ हम अकेले थे .

चलते चलते रास्तो में ,
बागो तक पहुंच जाते थे ,
पीछे मुड़कर देखते तो ,
माँ हम अकेले थे ..

जीवन के पन्ने पलटते गए ,
लेकिन वो पन्ने आज भी वैसे है ,
जिन पन्नो पर हम अकेले थे .

हर पन्ना एक नए दर्द से भरा था ,
कोई दर्द बाँटने वाला नहीं था ,
माँ क्यों हर पन्ने पर ,
हम एकेले थे .

वक्त के सभी पहर ,
हमसे लड़ते रहे ,
क्योकि वक्त को भी पता था ,
माँ हम अकेले थे .

चारो तरफ प्यार ही प्यार था,
कुछ मिला कुछ न मिला ,
एक तेरे प्यार के बिना ,
माँ हम अकेले थे .

चहल पहल की वो गालिया ,
आज भी याद आती रही ,
तेरे बिना माँ हर,
गालिया सूनी रही .

आज उसी बड़ी सी दुनिया में ,
मेरी एक दुनिया है ,
जिस दुनिया में हम कभी अकेले थे .
        हां हम कभी अकेले थे ..

 

 अंजली यादव

                                                            KGMU LKO  

   मेरे पापा के लिए ,जो कभी
                                                   इस दुनिया में बिलकुल अकेले थे .

7 Comments

  1. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 24/07/2017
  2. Anderyas Anderyas 24/07/2017
  3. ANU MAHESHWARI ANU MAHESHWARI 25/07/2017
  4. C.M. Sharma babucm 25/07/2017
  5. prahlad maurya Prahlad maurya 25/07/2017
  6. डी. के. निवातिया डी. के. निवातिया 25/07/2017
  7. Bindeshwar prasad sharma Bindeshwar Prasad sharma 26/07/2017

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