मुखप्रष्ठ » अशोक अंजुम » हौसला भी उड़ान देता है

हौसला भी उड़ान देता है

कौन सीरत पे ध्यान देता है
आईना जब बयान देता है

मेरा किरदार इस ज़माने में
बारहा इम्तिहान देता है

पंख अपनी ज़गह पे वाजिब है
हौसला भी उड़ान देता है

जितने मगरूर हुए जाते हैं
मौला उतनी ढलान देता है

बीती बातों को भुलाकर के वो
आज फिर से जुबान देता है

तेरे बदले में किस तरह ले लूँ
वो तो सारा जहान देता है !

Share Button

योगदानकर्ता ::

इस योगदानकर्ता द्वारा 784 रचनायें अब तक प्रकाशित की गयीं ।

अपनी प्रतिक्रिया दें

कवितायें ई-मेल से प्राप्त करे
(Enter your email address)

Delivered by FeedBurner

Powered By Indic IME