सुकून जो दिल को देते हैं – शिशिर मधुकर

बढ़ाओ हाथ कि अब रातें मेरी तन्हा ना कटती हैं मिली हैं जितनी भी सांसें हल्के हल्के सिमटती हैं एक सी ऋतु रहेगी तो कभी ना ये डाल महकेंगी …

तुमको मालूम तो होगा – शिशिर मधुकर

बड़ी मुश्किल से मैंने ज़िन्दगी में तुमको पाया था वरना तन्हाइयों में मेरे संग बस मेरा ही साया था ना कोई साथ था मेरे तन भी घावों से छलनी …

कल्पना का कोई छोर नहीं – डी के निवातिया

कल्पना का कोई छोर नहीं सृजन का इसके ठोर नहीं बिना पंख यह उड़े गगन में इसके आगे कोई और नहीं !! ! ! ! स्वरचित : डी के …

मशहूर ना रहते – शिशिर मधुकर

गर मेरी तरह तुम भी तड़पते फिर दूर ना रहते भुला सब कुछ नशे में ज़िन्दगी के चूर ना रहते अगर तुम ठान लेते साथ मुझको भी निभाना है …

नज़ारा – डी के निवातिया

नज़ारा *** कुछ इस तरह मुझ से किनारा कर लिया ! मेरे अपनों ने घर-बसर न्यारा कर लिया !! समझता रहा जिन्हे ताउम्र मै खुद का हमदर्द ! फूलों …

मेरी जिंदगी – बिन्देश्वर प्रसाद शर्मा – बिन्दु

कभी हंसाती है तो कभी रुलाती है मेरी जिंदगी ना जाने क्या – क्या खेल दिखाती है मेरी जिंदगी। हम तो गफलत में ऐसे इसी तरह भटकते रहे अबतक …

परचम जज्बातों का – शिशिर मधुकर

तुम सामने पड़े तो ये मन खुशियों से भर गया ढलका हुआ तेरा चेहरा भी थोड़ा निखर गया खुशियाँ मिली थी एक तरफ़ मायूसी कम नहीं गुल वो खिला …

सच्ची मुहब्बत ……….

मुहब्बत शिद्दत की निगाह है दर्द में भी चाहत बेपनाह है खुदा की इबादत जैसे मुहब्बत दुनियां के लिये ये गुनाह है मुश्किलें है हजारों माना मगर मुहब्बत में …

कल्पना – डी के निवातिया

आऒ जानें ….कल्पना क्या है ……….!! *** प्रत्यक्षानात्मक अनुभवों की ये कुँजी है बिंबों और सृजन विचारों की ये पूँजी है विचारणात्मक स्तर की रचनात्मकता ‘कल्पना’ नियोजन पक्ष की …

भाईचारा – बिन्देश्वर प्रसाद शर्मा – बिन्दु

समझो क्या है भाई चारा बिन इसके है कहाँ गुजारा। बिन मेल कुछ कहाँ है संभव साथ मिले तो दिखे किनारा। हर प्रयास में संग जरूरी है सफल जब …

शातिर – डी के निवातिया

शातिर *** वो देखो, वो जो भोला सा शख्स है ये मत पूछो वो कितना शातिर है, बात न पूछो उसकी हद-ऐ-शराफत की गरीबी का बाज़ार सजाना जानता है …

तुम्हारी अदा – डी के निवातिया

तुम्हारी अदा *** इतना प्यार करते हो, कभी न जताते हो तुम यदा कदा ही सही मगर, बहुत सतातें हो तुम कैसे न जां निसार करें हम तुम्हारी अदाओं …

मुझसे जीया नहीं जाता – शिशिर मधुकर

तेरे बिन इस ज़माने में मुझसे जीया नहीं जाता ज़हर का घूंट तन्हाई का भी ये पीया नहीं जाता लाख चाहा मगर ये घाव दिल के रिसते जाते हैं …

कोई कारण तो होता है -शिशिर मधुकर

कोई भी सोच मेरी तो परे तुझ से ना जाती है मुहब्बत कौन सा रंग अब मुझे आके दिखाती है अधिकतर ज़िन्दगी गुजरी मगर तन्हा रहा हूँ मैं मिलन …

आईना तुम ज़रा देखो – शिशिर मधुकर

मुहब्बत कर तो ली तुमने मगर अब पैर खींचे हैं दर्द इतना हुआ सोचो आँख हम अब भी मींचे हैं आईना तुम ज़रा देखो खिली सूरत जो दिखती है …

हलचल – बिन्देश्वर प्रसाद शर्मा – बिन्दु

सुरमई आँखों में काजल क्या बात है गली में हो रही हलचल क्या बात है। उनकी नाज वो नखरे जान ले लेगी हो जायेंगे कत्ल कितने क्या बात है …

ज़लवा – डी के निवातिया

ज़लवा *** जरुरी नहीं दुनियाँ में सिर्फ हुस्न का ज़लवा हो हमने तो कीचड़ के हिस्से में कमल को देखा है अभद्र हो या दीन-दरिद्र कद्र हर शै: की …

वक्ती खेल – शिशिर मधुकर

आज हम गैर लगते हैं कभी पर थे तुम्हें प्यारे कोई शिकवा नहीं तुमसे ये वक्ती खेल हैं सारे खुदा ने दिल दिया है तो इसमें जज्बात होते हैं …

मेरी तकदीर हो तुम – शिशिर मधुकर

मेरी ग़ज़लों ने अब ये सच ज़माने को बताया है मुहब्बत में किसी अपने ने मेरा दिल दुखाया है कितने अशआर कह डाले मगर ग़म तो नही छूटे किसी …