स्वेत वर्ण – बिन्देश्वर प्रसाद शर्मा (बिन्दु)

प्रिय भाषिणी सु मधुर रागिनी तेरी अंग अंग अमृत सु मधुर मधु मालिनी तूं दानव देव नर कामिनी सु रस वासिनी सत संगिनी । विवेक हारिणी सु शुभ आसनी …

मौन…..सी.एम्. शर्मा (बब्बू)…

तुम मौन हो बोलो कुछ जानते नहीं तुम तुम्हारे न बोलने से रिश्ता टूट रहा है हमारा दरार पड़ रही है दिलों में भगवान् के लिए कुछ बोलो मेरी …

संशयता -प्रशान्त तिवारी

चिड़ियों का गण हर नयी सुबह दाने को चुगने चलता है, हर पथिक अथक फिर से अपनी मंजिल पर आगे बढ़ता है। हर पग पर बधाओं के संकट रह-रह …

मैंने जाकर पूछा पंडित से

मैंने जाकर पूछा पंडित से दुःख दर्द कितने शेष रह जायेंगे एक भी गृह शेष बचेगा या सब मुझसे टकराएंगे कोई सरल सा उपाय बताकर मेरे दुःख दर्दों को …

प्रभात वर्णन (भाग 2)

*प्रभात वर्णन* (भाग 2) स्वर्ण रश्मियाँ बरसीं खुलकर, पर्वत शिखर अरुणमय होकर| श्वेत वर्ण सिंचित यह अम्बर, लगती है छवि अनुपम सुंदर। पावन प्रात सुहावन बेला, नव्य सृजन का …

तय करें हर राह मिल -जुल

*तय करें हर राह मिल-जुल…* हो सफल हर चाह मिल-जुल, तय करें हर राह मिल-जुल। इस जहां में शेष हैं जो, मंजिलों के ख्वाब सुंदर| हों भले दुश्वारियां पर, …

सृजन फिर से नया होगा – शिशिर मधुकर

अँधेरे जब कभी इंसान के जीवन में आते हैं तभी तो चाँद दिखता है ये तारे टिमटिमाते हैं सरद रातें हुईं लम्बी तो ग़म किस बात का प्यारे सुबह …

प्रभात वर्णन

*यह प्रभात की बेला अनुपम* बीती निशा मिटा अँधियारा, चन्द्र-भानु को मिला किनारा| खग कुल जगे प्रात गुण गाते, नेह राग का गीत सुनाते। रवि रथ की है छँटा …

माया नगरी – बिन्देश्वर प्रसाद शर्मा – (बिन्दु)

क्या करोगे तुम क्या करोगे रो रो कर एक दिन तो ऐसे जाना सब छोड़ कर। प्रेम से रहना प्रीत से जीना ही सीखें गुस्से में आकर भैया अब …

आसमान को जमीं पर चलते देखा है

मैंने आसमान को जमीन पर चलते देखा है अमीरों के माँ बाप को आश्रम में पलते देखा है कौन कहता है कि सच की हमेशा जीत होती है एक …

वो केवल मुस्कुराते हैं-शिशिर मधुकर

मुहब्बत करके जो मझधार में संग छोड़ जाते हैं लाख चाहा किया भूलें वो फिर भी याद आते हैं अगर बनता है हर इंसान केवल एक मिट्टी से कहो …

सच्चा प्यार — डी के निवातिया

सच्चा प्यार *** जिस ह्रदय में किसी को सराहने के पनपते विचार नहीं उसको भी सराहना पाने का बनता कोई अधिकार नहीं निसन्देह: त्याग के यथार्थ भाव का तात्पर्य …

एक शिक्षाप्रद कहानी – आपने हमे भी इनवाईट किया है !!

ट्यूशन का टाइम हो गया था और इंटीग्रेशन करते करते बहुत तेज भूख भी लग रही थी !! सर को प्रणाम करके सबको राम राम करके ज्यों ही घर …

नवयुग

नवयुग “””””””””””””””” हम आज के मतवाले है हम देश की शानबढ़ायेंगे आर्थिक आजादी लाकर दुनिया को दिखलायेंगे,,,,, डटे रहेंगे हर मुश्किल में मुश्किल आसान बनायेंगे बाधाओ के सीने पर …