राह में कभी कभी – अनु महेश्वरी

राह में कभी कभी, ऐसे लोग मिल जाते है, अंजान होते हुए भी, हमे खुशियां दे जाते है| ऐसे लोगो से मिलकर, अक्सर यही लगता है, इंसानियत अभी भी, …

लफ्ज़ फिसलने लगे — डी के निवातिया

:””; लफ्ज़ फिसलने लगे ;””; +*””*.*””* + अधरों के पुष्प कँवल उनके खिलने लगे है ! लगता है सनम से अब वो मिलने लगे है !! कुछ तो असर …

प्रेम में मिलावट

प्रेम शुद्ध कांच सा निर्मल था जब पेहली बार बचपन और यौवन के बीच हुआ धीरे-धीरे,जैसे-जैसे प्रेम को समझने की कोशिश की प्रेम में मिलावट घुलता गया प्रेम मिलावटी …

मुस्कुराहटें

नहीं मुस्कुराहटों का कोई जवाब छिपें हैं इनमें हजा़रों राज़ चली आती हैं कभी नम आँखों के साथ कभी थम जाती हैं शर्मो हया के साथ चहक जाती हैं …

ख़बर – मेरी शायरी……. बस तेरे लिए

ख़बर ख़बर उसके आने की सुन कर …………………. दिल झूम उठा पागल हो कर पर इस नासमझ को कौन समझाये ……………………… के अभी तो उससे …. अपनी जान पहचान …

माता रानी के द्वार — डी के निवातिया

“माता रानी के द्वार” *** हुम्म्म्मम्म्म्म…………..चलो ..चलो ………….! चलो ..चलो ……………..चलो ..चलो ………….! चलो ..चलो ……………चलो ..चलो ………….! हुम्म्म्मम्म्म्म…………..चलो ..चलो ………..! चलो रे चलो माता रानी के द्वार दुःख …

बात क्या करें – शिशिर मधुकर

मुहब्बत ना हो जब बीच में तो फिर बात क्या करें तड़पे ना जो मिलन को उससे मुलाक़ात क्या करें दिन ही जब इस शहर में मुश्किलों से गुज़रता …

‘ज़िन्दगी’ में उल्फ़ियत तो है

‘ज़िन्दगी’ में उल्फ़ियत तो है, सब के मन में बन्दियत तो है। कसर भी नहीं रही कुछ भी, इंसानियत ही तो मन में है। गुमांन करते फिरें शख़्स ख़ुद …

कैसे बनेगी कोई बात – अनु महेश्वरी

कैसे सुधरेंगे हालात, कैसे बनेगी कोई बात, कथनी और करनी में, जब तक रहेगा विरोधाभास| कैसे कायम रहेगा विश्वास, कैसे बढ़ेगा सच का मान, चलता रहेगा झूठ धरल्ले से, …

ग़ज़ल (दोस्त अपने आज सब क्यों बेगाने लगतें हैं)

जब अपने चेहरे से नकाब हम हटाने लगतें हैं अपने चेहरे को देखकर डर जाने लगते हैं वह हर बात को मेरी क्यों दबाने लगते हैं जब हकीकत हम …