काल जीवन का – शिशिर मधुकर

मुहब्बत जिसने की मुझसे न संग उसने निभाया है अब तलक काल जीवन का ये मैंने तन्हा बिताया है सभी बस छल गए मुझको लुटा बैठा हूँ मैं अब …

सोन चिरैया – बिन्देश्वर प्रसाद शर्मा – बिन्दु

खेत का सोंधी मिट्टी महके इस पीपल की छाँव में। सोन चिरैयाँ फिर फिर आवे मोती चमके पाँव में।। सरसो पीले फूल से सज गये गोरी झूमे साँझ में। …

कौतूहल – बिन्देश्वर प्रसाद शर्मा – बिन्दु

कितनी बड़ी है दोस्ती, कितना बड़ा है प्यार जीवन पर ही चल रहा, इतना बड़ा संसार। कौतूहल में पड़ गये, निकलो बाहर आज सत्य अहिंसा प्रेम का, मन में …

अजब होय गया – बिन्देश्वर प्रसाद शर्मा – बिन्दु

  अजब होय गया रे भैया ये गजब होय गया बेटवा निकला 420 देखो गजब होय गया। बाप ना जाने छीना – छपटी, मैया ना जाने भेद बाप बेचारा  …

मैं बस मैं बनकर रहना चाहता हूँ

मैं बस मैं बनकर रहना चाहता हूँ अभावो की गोद में पला हूँ दिन के उजाले को जीने के लिए रात-रात भर जागना चाहता हूँ अब आईने में खड़ा …

सुकूं पाने की खातिर- शिशिर मधुकर

लाख चेहरे नज़र के सामने दुनिया में आते है एक जलवे तेरे हमको यहाँ लेकिन सताते हैं बड़ी उलझन सी होती है तू जैसे दूर रहता है मुहब्बत करने …

भूल जाना जरूरी होता है

कभी-कभी खुद को फैलाने के लिए अपने अतीत को समेटना जरूरी होता है जलते हुए आग से राख तो निकलेंगे हीं उन राखो से अपने हाथ बचाना जरूरी होता …

तुम ठहर जाओ कभी…सी.एम्.शर्मा (बब्बू)…

(जनाब मिर्ज़ा ग़ालिब साहिब की एक ग़ज़ल है “आह को चाहिए इक उम्र असर होने तक…कौन जीता है तेरी ज़ुल्फ़ के सर होने तक” इसी ज़मीन में लिखी मेरी …

धूप देखो तो ना खिली – शिशिर मधुकर (बिना रदीफ की ग़ज़ल )

लाख ढूंढा किया फिर भी मुहब्बत मुझको ना मिली रात गुजरी है दिन निकला धूप देखो तो ना खिली घाव देता रहा जो भी मिला उल्फ़त की राहों में …

ये बालक कैसा? (हाइकु विधा)

ये बालक कैसा? (हाइकु विधा) अस्थिपिंजर कफ़न में लिपटा एक ठूँठ सा। पूर्ण उपेक्ष्य मानवी जीवन का कटु घूँट सा। स्लेटी बदन उसपे भाग्य लिखे मैलों की धार। कटोरा …

तेरे इन्तज़ार में – सर्वजीत सिंह

तेरे इन्तज़ार में सुबह से शाम हो गई तेरे इन्तज़ार में अब देर ना करो तुम अपने दीदार में यहाँ पर तो लोग आते जाते बहुत हैं कोई खलल …

तलाश – बिन्देश्वर प्रसाद शर्मा – बिन्दु

खुद की तलाश में भटकता रहा दुश्मनी के कारण अटकता रहा। कभी मैं सूली पर लटक गया कभी खौफ में सिमटता रहा। खुदगर्ज क्या रास्ता दिखायेंगे कभी गिरा कभी …

गुनेहगार

तेरी उन गलियों में ,जाना बेकार ही सही फिर करके देखेगें ,झूठा इंतजार ही सही माना नहीं रहे निशान चाहतों के कूचों पर फिर भी गुजरेंगे, बनकर तेरे गुनेहगार …

दीपावली – बिन्देश्वर प्रसाद शर्मा – बिन्दु

अभी अभी तो दीप जला है अभी अभी दीवाली है। झूमो भैया बहना नाचो चारो तरफ खुशहाली है।। खूब पटाखे ये फुलझड़ियाँ सब के दिल बहलायेंगे । खूब मिठाई …

प्रीत

लिखबो पढ़बो आयो,बैठ्यो थारे संग। भैजा रै सगळे भेदा,और निकळगी जंग। लेखणी नै माण मिल्यो,स्वम मिल्यो छै प्रीत। कृष्ण ळिख अर्चणा करै,गाता रहो थै गीत। ✍कृष्ण सैनी(विराटनगर) 🙏🙏🙏🙏🙏🙏 मेरी …