रिश्तों की पौध – शिशिर मधुकर

साफ दिल के साथी से जब नज़रें मिलाओगे वो हँसती हुई खुद की छवि तुम देख पाओगे प्रेम और विश्वास संग जो तुम घर बनाओगे सुख दुःख के हर …

बधाई सन्देश

बधाई सन्देश आपके निश्छल प्रेम, सहयोग और आशीर्वाद से प्राप्त प्रतिफल के प्रतीक इस प्रमाण पत्र के  लिए आप सभी साथियो का तहदिल से धन्यवाद एवं कोटि कोटि आभार व्यक्त …

फिर दस्तक देती है मस्ती मेरे दिल के गांव में – मनुराज वार्ष्णेय

फिर दस्तक देती है मस्ती मेरे दिल के गांव में छोड़ गमो की सड़कों को मैं लेटा आनंद की छाव में बहुत तड़पा हूँ प्यार में पड़कर क्या क्या …

समर्पण और चतुराई – शिशिर मधुकर

करती हो तुम समर्पण मुझको जीत लेती हो कसमें जिन्दगी की फिर सारी पुनीत देती हो जब जब भी तुमने मुझसे की है यहाँ चतुराई अपने दोनों हाथों से …

सच क्या होता है—डी के निवातिया

(सच क्या होता है) हमने जो पूछ लिया सच क्या होता है ! तिलमिला के बोले ऐसे न बयां होता है !! लांघ रहे हो आदो-अदब का दायरा जनाब …

प्रेम की कसमें – शिशिर मधुकर

Original मैं तुमको बुरा कहती हूँ लोग ये बताएँगे तुम दूर रहो मुझसे ये ही सब सिखाएँगे नादां हैं सभी लोग जो ये जानते नहीं हैं प्रेम की कसमें …

कुदरत का करिश्मा – शिशिर मधुकर

मैं जानती हूँ तुम बस मुझे देखना चाहते हो कैसे कहूँ तुम भी तो मेरे ख्वाबों में आते हो अचरज नहीं बात ये कुदरत का करिश्मा है हर पल …

मेरी मजबूरी – शिशिर मधुकर

भूली नहीं हूँ तुमको पर जानो मेरी मजबूरी मैं बस तुमको चाहती हूँ कहना नहीं ज़रूरी मैं तेरी दो बाहों में अब चाहे ना सिमट पाऊँ रूहों के बीच …

महादेव—डी के निवातिया

ज   पाप पुण्य के युद्ध में जो खुद को मिटाता है। त्याग कर अमृत हलाहल विष अपनाता है। निस्वार्थ लोकहित में जीवन अर्पण कर दे। वो स्वयंशंभू, नीलकंठ, …

उठ गया

जाने क्यों कायनात से,भरोसा अपना उठ गया लगता है हमदर्द कोई, हमसे कहीं तो रुठ गया बांधा था बड़ी मुश्किल से नेह डोर को जिनसे पता चला न कौन …