अपने हसीन रुख़ से हटा कर निक़ाब को- SALIM RAZA REWA : GAZAL

.. अपने हसीन रुख़ से हटा कर निक़ाब को, शर्मिन्दा कर रहा है कोई माहताब को . कोई गुनाहगार या परहेज़गार हो, रखता है रब सभी केअमल के हिसाब …

बिन पटाखे दिवाली सून

प्रदूषण की आड़ में बंद कर दी आतिशबाज़ी l बोले ना होगा धुआँ ना होती पैसो की बर्बादी ll समझ नहीं आता क्या प्रदूषण यही फैलता है l सिगरेट का धुआँ, …

माटी का पुतला — डी के निवातिया

माटी का पुतला ◊ हे मानुष ! जीता है किस गुमान में पलता, बढ़ता है जाने किस अभिमान में !-! जानकर भी हर कोई अन्जान है कहते है यही …

दीप और बाती – बिन्देश्वर प्रसाद शर्मा (बिन्दु)

तुम रुई बनो मैं माटी तुम दीप बनो मैं बाती। हम दोनों मिल जायेंगे प्यारे दीप जल जायेंगे। दूर होगा सब अंधियारा फैलेगा अब उजियारा।। तुम सीप बनो मैं …

मंज़िल – मेरी शायरी……. बस तेरे लिए

मंज़िल कई बार घबरा जाता है ये दिल देख कर ज़िन्दगी की मुश्किलें …………………… पर कभी मैं टूटा नहीं हौसला छोड़ा नहीं क्योंकि लगता है के मंज़िल बहुत करीब …

प्यार तो बस महकता महकाता है…सी.एम्. शर्मा (बब्बू)…..

प्यार  का  अंदाज़  मैंने  तुम  से है सीखा…. नज़रें  चुराना भी  तो  तुम्हीं  से है सीखा… इज़हारे  जज़्बात  ब्यान कैसे करूं तेरा… सिले होंठों से आँखों में मुस्काना सीखा…. …

अफरोज-ए-आफताब है तेरी काया!

लव तेरे अमृत के प्याले नैन तेरे हैं मधुशाले बात तुम्हारी मीठी मीठी जैसे मधु के रस टपके हंसी तुम्हारी गुलज़ारो सी गुलमोहर सी रंग बरसे बाल तुम्हारे काले …

चुप से रहते हैं – शिशिर मधुकर

हमेशा बोलने वाले हम आज चुप से रहते हैं तुम्हें कैसे बताएं दिल में कितनी पीर सहते हैं हमें तो मिल के लूटा है यहाँ पे ख़ास अपनों ने …

एहसास – बिन्देश्वर प्रसाद शर्मा (बिन्दु)

**************************** “जिसकी हमें तलाश थी उससे खास हो तुम दूर हो कर भी मेरे दिल के पास हो तुम अब न भटकेंगे और न ठोकरें खायेंगे उभरते मेरे सांसो …

यादों के चिराग़ – दीप्ति गोयल

महकता है ये तन मेरा जब भी ख़्याल आता है जेहन में तेरा दूर रहकर भी ना टूटे तुझसे मन का वो नाता है मेरा। गुज़रेगा वक्त बदलेंगे हम …

अश्क़ – मेरी शायरी ……. बस तेरे लिए

अश्क़ अश्क़ बहुत बहाये मैंने तेरी मोहब्बत में ……………… पर मुद्दत के बाद जाना के तू पत्थर का ईक बुत है …………………….. ! ! ! शायर : सर्वजीत सिंह …

चांदनी है या कोई मोतियों की माला है – SALIM RAZA REWA : GAZAL

.. चांदनी है या कोई मोतियों की माला है मेरे घर के आंगन में तुमसे ही उजाला है .. उसकी ही हुक़ुमत है उस का बोल बाला है जिसके …

लकीर – शिशिर मधुकर

आधी अधूरी चाहत यहाँ बस पीर देती है बेबसी में डूबी हुई अक्सर तकदीर देती है ज़िन्दगी जिसके निकट तन्हा सी रहती है ना मिटने वाली वो तो एक …

मेरी गजल– दर्द- ऐ -गजल भाग 03

मेरी गजल – दर्द ऐ गजल भाग – 03 १ मैंने प्यार में संभलना सीखा तेरे इंतज़ार में जीना सीखा तेरे लिए मरना सीखा तुमने नजरो से साजिश किया …

घावों की पीड़ा – शिशिर मधुकर

हर तरफ़ आग नफ़रत की यहाँ मुझको जलाती है मेरी रूह चैन पाने को ही तो बस तुझको बुलाती है इस कदर मुझको तोड़ा है ज़माने भर में अपनों …

राहत नहीं होती – शिशिर मधुकर

बदल जाए समय के संग जो चाहत नहीं होती तन्हा रहना पड़े जीवन में तो राहत नहीं होती काश उनसे उल्फ़त की हम आदत बदल पाते ये रूह इस …

ओस की बूंदें

जीवन में सुख-दुख हैं सिर्फ एक समय तक बदल जाती हैं परिस्थितियां ठीक वैसे ही जैसे भोर में ओस की बूंदे चमकती हैं पत्तियों पर सूर्य के आगमन तक …

चौपाई – बिन्देश्वर प्रसाद शर्मा (बिन्दु)

बिनु ज्ञान नहीं उतरै पारा श्रम बिनु नाहीं होत किनारा। निश्छल मनवां करै विचारा कलियुग कै बस प्रेम अधारा। वश में राखौ आपन नैना बड़ सुकून से बीतै रैना। …

ठेस — डी के निवातिया

ठेस ◊♦◊♦◊ जिसको जितना चाहा उससे उतना दूर हो गये जब-जब किया हौंसला तब-तब मज़बूर हो गये उनकी नज़रो ने हमें पत्थर से शीशा बना डाला    लगी क्या …