हाँ मैं वही बसंत हूँ – डी के निवातिया

हाँ मैं वही बसंत हूँ …. =+= जो कभी नई कोंपलो में दिखता था कलियों में फूल बनकर खिलता था हवाओ संग ख़ुशबू लिए फिरता था चेहरों पे नई …

ढूँढ़ता हूँ…._अरुण त्रिपाठी

*’तेरी कहानी ढूँढ़ता हूँ…* *(ग़ज़ल)* अरकान 2122 2122 2122 2122 वक्त के अखबार में तेरी कहानी ढूँढ़ता हूँ। उम्र के इस आइने में इक निशानी ढूँढ़ता हूँ। दौर मिट …

बसंत – मधु तिवारी

💐बसंत 💐…मधु तिवारी पूछे बसंत कहाँ पर आऊँ बोलो किस स्थल लहराऊँ घर बने भूमि बाँट-बाँट कर चमन पौध को काट-काट कर वहाँ कहो कैसे मुसकाऊँ पूछे बसंत कहाँ …

बिना श्रद्धा- शिशिर मधुकर

बिना श्रद्धा आज साथी कोई जब साथ रहता है दिलों को तोड़ने वाली वो कड़वी बात कहता है चला था जिसके सहारे सोचकर मैं काटने जीवन उसकी मतलब परस्ती …

बसंत -मधु तिवारी

💐बसंत 💐…मधु तिवारी पूछे बसंत कहाँ पर आऊँ बोलो किस स्थल लहराऊँ घर बने भूमि बाँट-बाँट कर चमन पौध को काट-काट कर वहाँ कहो कैसे मुसकाऊँ पूछे बसंत कहाँ …

यही बस देखा है मैंने तो- शिशिर मधुकर

मुहब्बत जब किसी से करके मैंने सपने सजाए हैं तूफानों ने सदा आकर मेरे दीपक बुझाए हैं भले ही कोई अपनी बात से कितना भी मुकरा हो मैंने वादे …

।। चिन्तन ।।

॥ चिंतन ॥ जीवन में हर मानव के, अनुभव होते भिन्न भिन्न । कोई संतुष्ट उपल्बधियों से, किंतु मन सदा रहता है खिन्न ॥ 1 ॥ क्या खोया क्या …

हम ही दुष्ट हो गए – डी के निवातिया

हम ही दुष्ट हो गए *** यार तमाम अपने अब रुष्ट हो गए करके माल हज़म हष्ट-पुष्ट हो गए हमने उन्हें ज़रा सा क्या रोका टोका नजरो में उनकी …

सुनो चाँद, कल ना…. काला टीका लगा कर आना

सर्दियों में ना रात…… जल्दी आ जाया करती है दुकान से घर लौटते वक़्त अँधेरा हो जाता है सड़क पर चारो तरफ भीड़ … ट्रैफिक का शोर…. तकरीबन पन्द्रह …

~~ प्रेम ~~

समय की सिलवटों में मेरे प्यार की सीवन नहीं उधड़ी है समय-समय पर मिल कर हम ने उसकी सिलाई पक्की की है। फर्क बस इतना है कि उसे जताने …

लाचार अब तंग तिरंगा है – बिन्देश्वर प्रसाद शर्मा (बिन्दु)

अमीरों के लिये क्या? गरीबों के लिए महंगा है दुनिया में हर जगह हर तरफ यही तो पंगा है। पांच सदस्य दस जगह दस शहरों में दस महल भूखे …

शायद…..

शायद इस जिंदगी में एक ऐसा दिन भी आएगा जब हम एक दूसरे के साथ हँस सकेंगे कुछ पुराने किस्से याद करके मैं तुम्हें चिढ़ा सकूंगा कुछ पुराने गाने …

मेरा कुसूर.._अरुण त्रिपाठी

*मेरा कसूर नहीं..* इससे ज्यादा मेरा कसूर नहीं|| मुझ पर चलता तेरा गुरूर नहीं।। तेरी फितरत ने तुझ को दूर किया, मेंरी नजरों में दिल से दूर नहीं। तेरी …

तृष्णा – शिशिर मधुकर

नदी सूखी पड़ी है जब प्यास आखिर बुझे कैसे बरस जा बदली जल्दी से बताऊँ अब तुझे कैसे पता था तुझको जब मौला मेरी तृष्णा पुरानी है बता कुछ …

एक प्रेरणादायक कहानी – क्लैश ऑफ़ क्लेन बना क्लेश की वजह !!

ट्रेन दोपहर ३ बजे की थी और कड़की सर्दी का मौसम था !! कोहरा होने के कारण ट्रेन रात 9 PM बजे की हो गयी पर ट्रेन पकड़ने से पहले एक …

मित्र- मधु तिवारी

💐मित्र💐…मधु तिवारी “कैसा हो मित्र” पर सवाल होना चाहिए दोस्ती का भाव बेमिसाल होना चाहिए निर्बल बली का साथ, होय तो क्या बात है सुग्रीव-राम मित्र सा,मिसाल होना चाहिए …

भंवर से कश्ती लगेगी किनारे कैसे?

‘ग़ज़ल’ को कौन रख सका है, पहरे में ‘अरुण’ पलक झपकते बदल लेते हैं रुख ‘रदीफ़-काफिये’ बया ने मुश्किलों से बनाया ‘घरौंदा’ अपना तूफां ने इक पल में उड़ा …

सपना – मधु तिवारी

💐सपना कभी अपना नहीं होता💐मधु तिवारी सपना कभी अपना नहीं होता सतपथ चल कुंदन सा तपना नहीं होता पथ पसंद सरल सभी को कठिन राह चलके खपना नहीं होता …

अफ़सोस न कर – डी के निवातिया

अफ़सोस न कर *** मेरे वतन के हिस्से ये सौगात हर बार मिली है ! कभी गूंगो की कभी बहरो की सरकार मिली है !! किसी में हुनर सुनने …