==* नजफ़ हैदर की पढ़ाई *==

नजफ़ हैदर जेएनयू में इतिहास के प्रोफ़ेसर है उनके बोल पर मेरे बोल…………. नजफ़ हैदर बोल रहे है पद्मावती एक कहानी है पद्मावत साहित्य से आई ऐतिहासिक परछाई है …

तैरना आना पहली शर्त है..

तैरना आना पहली शर्त है नाव भी मैं, खिवैय्या भी मैं लहरों से सीखा है मैंने तूफां-ओ-आंधी का पता लगाना, जो बहे लहरों के सहारे, डूबे हैं तैरना आना …

◆Mind न करो भाई◆

लो अब आजम बतायेंगे क्या थे काम राजपूतों के पूछे जरा बापसे अपने कारनामे राजपूतों के संभल कर बात कर पगले कहीं न हो म्यान खाली अभी सोये नही …

रहनुमा ग़ालिब नहीं तो कौन है…सी.एम्. शर्मा (बब्बू)…

रूह में न है खुदा तो, कौन है… तुम नहीं गर वो बताओ, कौन है…. लफ्ज़ से वाकिफ नहीं हूँ, उससे मैं… लम्ज़ से मुझको दिखाओ, कौन है…. हार …

शीर्षक-अभी जारी है

शीर्षक-अभी जारी है अपने सपनो के देश को बदलने की तेयारी अभी जारी है वो जो हुक्मरान बैठे है सिहांसन पर यही तो दिलासा दे रहे है नोटबंदी करवा …

कर्तव्य – बिन्देश्वर प्रसाद शर्मा (बिन्दु)

देने वाला एक है दाता मांगे लाख करोड़ आस लगाये बैठे बैठे अपना सिर ना फोड़। इतनी सुंदर काया देकर बुद्धि ज्ञान भर भेजा जैसी कर्तब्य अब फल वैसा …

मैं प्यार नही कर सकता

समझ गया मैं भली भांति दुनिया के तौर तरीकों को चोरो का पलड़ा भारी है मिलती राहत न सरीफों को क्यों दिल लगाने से अक्सर दिल चूर चूर हो …

दूर रह कर हमेशा हुए फासले

दूर रह कर हमेशा हुए फासले ,चाहें रिश्तें कितने क़रीबी क्यों ना हों कर लिए बहुत काम लेन देन के ,विन मतलब कभी तो जाया करो पद पैसे की …

लकीर के फकीर — डी के निवातिया

लकीर के फकीर ! अब से अच्छा तो, कल परसो का बीता जमाना था अनपढ़, लाचारी में, लकीर के फकीर बन जाना था क्या हुआ, पढ़-लिखकर, चाँद या मंगल …

न जाने क्यूँ…सी.एम्. शर्मा (बब्बू)…

न जाने क्यूँ…. मैं कोशिश कर रहा था… उसकी आँखें पढ़ने की… पर कुछ पढ़ नहीं पाया… चमक में उनकी…. लब सिले न थे उसके… पर मैं कुछ सुन …

जिंदगी की किताब…… काजल सोनी

तीन पन्ने हैं हमारी जिंदगी की किताब में…. पहला पन्ना पलट चुका है जिसे हम दुबारा नहीं पलट सकते …… तीसरा पन्ना जो वक्त आने पर खुद ब खुद …

क्यों बदली बदली ये नजरें

    क्यों बदली बदली ये नजरें , क्या दिल मे छुपाये बैठी हो गर प्यार मेरा तुम चाहती हो , क्यों पलकें झुकाये बैठी हो इक बार करो …

दिल लगाकर कव किसी को चैन यारों मिल सका है

जिंदगी ने जिस तरह हैरान हमको कर रक्खा है मन कभी करता है मेरा जिंदगी की जान ले लूँ दिल लगाकर कव किसी को चैन यारों मिल सका है …

पीढ़ियाँ पर बढ़ेंगी इसी राह पर आगे

कोट के क़ाज में फूल लगाने से कोट सजता है फूल तो शाख पर ही सजता है, क्यों बो रहे हो राह में कांटे तुम्हें नहीं चलना पीढ़ियाँ पर …

हमाई एक नई बुंदेलखंडी कविता

एक मौडी से हमें , खूबई हतो प्यार लेकिन वा नई हती…,मिलवे को तैयार वा वी करत-ती…,का जाने काय से डरत-ती मिल गई एक दिना.., वा हमें बजार ऊतई …

काली -स्याह सर्द रातों में ,,,,

काली – स्याह सर्द रातों में तन्हाई में लिपटी तेरी यादों से गुमसुम -सी खामोश खड़ी मैं बातें करती तेरी बातों से काली -स्याह सर्द रातों में ,,,,,,,,, बूँद …