नागफनी के बीच गुलाब — डी के निवातिया

नागफनी के बीच गुलाब <><><> वो जो नागफनी के बीच गुलाब खिला है। मेरी पाक मुहब्बत का नायाब सिला है।। अहसासों के मधुर पलो से सींचा है इसे तब …

जो साथ सच्चा है – शिशिर मधुकर

मिले कुछ ना ज़माने में मगर जो साथ सच्चा है मेहरबान है खुदा तुम पे कि मददगार अच्छा है घृणा मन में पाले कोई जब हरदम संग रहता है …

जिस अंदाज से तुम नजरअंदाज करते हों .

जिस अंदाज से तुम नजरअंदाज करते हों हमारे रिश्ते को और भी राज़ करते हों तुम्हे समझे या खुद को ढूंढे, क्या करे हम आंसू छुपाते है और तुम …

उत्तरदायी हम सभी है – अनु महेश्वरी

सूरत की कायल हुई, दुनिया जब से, सीरत पीछे रह गयी, धन की पूजा होने लगी जब से, ईमानदारी पीछे छूट गई| भारत के इस हालात के लिए, उत्तरदायी …

मैं पवन होता

मैं पवन होता तो, नदियों आकाश-पाताल तक उड़ता। तरु के पातों को स्पर्शित कर, मैं जन-जन को हर्षित करता। पहुँच यदि तरिणी तक, तो मृदु तरंगों के सह बहता। …

पिता के जैसा दिखने लगा हूँ मैं

काम और उम्र के बोझ से झुकने लगा हूँ मैं अनायास ही चलते-चलते अब रुकने लगा हूँ मैं कितनी भी करू कोशिश खुद को छिपाने की सच ही तो …

कभी देशद्रोही, तुम मत बनना – अनु महेश्वरी

अगर भला न कर सको, चलेगा, कभी किसी का बुरा मत करना| अगर दानवीर न बन सको, चलेगा, कभी किसी के हक़ का मत छीनना| प्यार से बात न …

सर्वशक्ती उन्नती का एक यही वरदान हैं- बिट्टू

सर्वशक्ती उन्नती का एक यही वरदान हैं सहयोग हो हर एक जन का ,तभी सरल हर काम हैं वो महल ही बिखर गया है जहा दिलो मे खटास हैं …

दिखता शिवाला है – शिशिर मधुकर

तुम्हें मैंने सम्भाला है मुझे तुमने सम्भाला है एक दूसरे के दुःखों का भी हल निकाला है पापी लोगों को प्रेम में व्याभिचार दिखता है साधुओं को इसमें मगर …

दिलों में नहीं दूरी – शिशिर मधुकर

मुझे तुमसे नहीं शिकवा समझता हूँ मैं मजबूरी हूँ चाहे दूर नज़रों से फिर भी दिलों में नहीं दूरी यह जीवन तो औरों के लिए भी जीना पड़ता है …

विरोधाभास – अनु महेश्वरी

पत्थरों को, ईश्वर मान पूजा जाता है जहाँ, कभी कभी वही, जवानो पे भी, बरसते है| नौरात्र में कन्या की पूजा होती है जहाँ, वही कन्या भ्रूण की भी, …

“हे कृष्णा!”

मैं तेरी जोगन सुन बनवारी मन मन्दिर में आन विराजो रास रचैया , गोवर्धन धारी डगर-डगर ढूँढू तोहे सांवरे राह निरख नैना भए बावरे हे गोपेश्वर , पीताम्बरधारी दधि …

तीन तालाक-मधु तिवारी

कैसा है ये तीन तलाक महिला को बना दिया मजाक सदियों से ये कुप्रथा मे स्त्री होती रही हलाक तारीफ ए काबिल तये प्रयास लगाते रहे लोग कयास किया …

अकेले सूरज से ही पुरे ब्रम्हांड में रोशनी होती है – अनु महेश्वरी

बिन मेहनत मिला धन कभी टिकता नहीं, मेहनत से मिली सफलता जाहिर होती है| बस पैसो से जो रिश्ते बनते वो टिकते नहीं, स्नेह से बंधा रिश्ता ही केवल …

तन्हा बेचारा – शिशिर मधुकर

मुझे छेड़ा ना गैरों ने फ़कत अपनों ने मारा है सारी उम्र गुजरी है मगर दिल तन्हा बेचारा है मोह ममता के रिश्तों ने मुझे भी बाँध रखा है …

चुनी जब राह मंजिल की – शिशिर मधुकर

चुनी जब राह मंजिल की तनिक सोचा नहीं मैंने लम्बे रस्ते में कपटी लोग लूट लेते है सभी गहने पिटा बैठा हूँ अब सब कुछ गँवा के कारवां से …

प्रेम का अंकुर — डी के निवातिया

प्रेम का अंकुर *** परावर्तन के आईने में प्रेम का अंकुर उगाना है आत्मीय मिटटी में बोध का उर्वरक मिलाना है प्रेम रस से परिपूर्ण बन जायेगा ये फलित …