उसी पे हँस के जीना है – शिशिर मधुकर

वो मेरा हो नहीं सकता जिसने मेरा चैन छीना है ज़हर ना चाह कर भी पर मुझे जीवन में पीना है धार है तेज नदिया की और इसे पार …

टूटने की भी सीमा है – शिशिर मधुकर

मन की बात खुलकर के जहाँ पे कह नहीं सकते ऐसे हालातों में इंसान कभी खुश रह नहीं सकते तेरे नज़दीक आते हैं तो फ़कत रुसवा ही होते हैं …

अगर दिल खूबसूरत है – शिशिर मधुकर

अगर दिल खूबसूरत है नज़र चेहरे पे आता है कोई मुखड़ा मुझे हरदम तभी इतना लुभाता है मुहब्बत वो नहीं समझा उम्र गुजरी है पर सारी साथ एक ऐसे …

कोई तो बताये वो कैसे यहाँ आया था

कोई तो बताये वो कैसे यहाँ आया था मेरा मुकद्दर सहसा बदलने यहाँ आया था। कितना खामोश, तन्हा, उदास दिख रहा है वो ना मालूम किस-किससे मिलके यहाँ आया …

मंजर – बिन्देश्वर प्रसाद शर्मा (बिन्दु)

लुत्फ़ – ए-रवानी का अब सिलसिला देखिये इस बाग – ए – चमन में फूल इक खिला देखिये। है कितनी दिलकश, नहकतों वाली मंजर अब्रे बहार, इनकी शिकवा न …

उसी उदास शाम की राह तकते हुए

थकी हुई उदास शाम, रोज की तरह, फिर आई है मेरे साथ वक्त बिताने, मैं सोचता हूँ उसे कोई नया तोहफा दे दूं, मुस्कराने की कोई वजह दे दूं, …

अभी उम्मीद बाकी है – शिशिर मधुकर

वो मेरे साथ रहता है मगर फिर भी ना मेरा है फ़कत तन्हाइयों नें ज़िन्दगी में मुझको घेरा है बड़ी लम्बी हुईं है रात इस जीवन के मेले की …

कातिल ये बहरे हैं – शिशिर मधुकर

भुला दो तुम मुझे चारों तरफ़ बैरी के पहरे हैं रोशनी अब नहीं दिखती अंधेरे इतने गहरे हैं संभालो मत ना उठने दो तूफां को समुन्दर में लील जाएंगे …

माँ — मधु तिवारी

💐माँ 💐 …. मधु तिवारी माँ तेरी ममता का, मोल नहीं है। इससे ज्यादा कुछ,अनमोल नहीं है। कोख से जनम दिया,अमृत पिलाया है एक-एक निवाला, तूने खिलाया है तेरे …

मैं अपने ब्लॉगस्पॉट वेबसाइट को और बेहतर कैसे बना सकता हूँ ?

सर्वप्रथम ये प्रश्न एक कौरियन मित्र प्रवीण मारुकोलू द्वारा क्योरा पर पूछा गया ! जिसको हिंदी में बताने का मेरा मन किया ! अब आते है मूल प्रश्न के उत्तर पर …

मिलन – विदाई…सी.एम्.शर्मा (बब्बू)…

छत पे कोआ कांव कांव कर रहा है…. कोई और तो अपना है नहीं…शायद… तुम आ रही हो कहीं… मिलोगी मुझसे तो बताऊंगा तुझे… जीना कितना दुश्वार था तेरे …

जगदम्बे भवानी- Bhawana Kumari

है माँ दुर्गे जगदम्बे भवानी तू तो विद्या दायनी है तेरी महिमा अपरंपार तेरे खेल निराले है कभी काली,कभी गौरी बन तो कभी सरस्वती बन कर नित नए रूप …

जी भर के इठलाती हूँ – शिशिर मधुकर

जब जब तुम पर मैं अपने अधिकारों को जतलाती हूँ तुम मेरे हो सब लोगों को इस सच को ही बतलाती हूँ मेरी बचकाना बातों पे जब भी तुम …

मुलाकातें – शिशिर मधुकर

मुलाकातें बड़ी मुद्दत से अपनी हो ना पाई हैं तेरी राहें सदा तकती ये आँखें सो ना पाई हैं बड़ा तूफान आया था और बरखा हुईं जमकर निशां अपनी …

तुमको ख़बर होगी – शिशिर मधुकर

मेरी नज़रों से खुद को देख लो तुमको ख़बर होगी ये मेरी ज़िंदगी तेरे जलवों के बिन कैसे बसर होगी तेरी अपनी मुसीबत है ये सच स्वीकार है मुझको …

माँ दुर्गा आओ मेरे द्वार – डी के निवातिया

माँ दुर्गा आओ मेरे द्वार *** *** **** ! भक्त की अरदास ये बारम्बार ! आ-माँ-आ, तू, आ मेरे  द्वार !! तुम असुर विनाशिनी तुम कर्मफलदायिनी तुम नवरूप स्वारिणी …

बारिश हुई जब प्रेम की – शिशिर मधुकर

सोचे बिना ये इश्क मैंने तुमसे जो कर लिया अपने वीरान सपनों को तेरे रंग से भर लिया कोई नहीं है ऊँच नीच अब तेरे मेरे दरम्यान तेरी हर …

मुहब्बत में वो ताकत है – शिशिर मधुकर

सुबह उठते ही जो मुझको तुम्हारी दीद मिल जाए मेरे मन के भीतर की हर कली फिर तो खिल जाए तू अपने मरमरी हाथों से मेरी जुल्फों को सहला …