प्रतिशोध

कब तक पठानकोट,कब तक उरी कब तक सहेंगे पुलवामा अब तो जागो हे पुरूषोत्तम करो आतंकरूपी रावण का खात्मा भाता नही अब छोटी सर्जरी न भाता अब कोई वार्ता …

फाग की ये धुन

फाग की ये धुनें क्या कहती है सुनें बुराई को त्यागें हम अच्छाई को चुनें होली के ये रंग हृदय में लाते तरंग दूर करते उदासियां जगाते उत्साह उमंग …

उल्फ़त में दीवाने – शिशिर मधुकर

अरे उल्फ़त में दीवाने मेरे पीछे क्यों आता है घूम के जुड़ ही जाएगा अगर जन्मों का नाता है समय से ही मिला करती हैं सारी नेमतें जग में …

गुनाह- शिशिर मधुकर

अरमान टूटते हैं जब उल्फ़त की राह में दिल में मिलेगा दर्द एक ऐसी ही चाह में नज़रों से मैंने आज भी उसको किया दुलार लेकिन दिखी ना तिश्नगी …

होली

अयोध्या से लेकर जनकपुर तक राम खेले होली जानकी संग मथुरा से लेकर वृन्दावन तक श्याम खेले होली गोपियों संग सरयू से लेकर यमुना तक होली के रंग में …

आखिर तुम क्यों चली गई

शीर्षक-आखिर तुम क्यों चली गई तुम क्यों चली गई तुम तो थी ज़िन्दगी मेरी फिर मेरी साँसे ले कर क्यों चली गईं आँखों मे बसी थी तुम फिर क्यों …

लौ लगी कृष्णा तेरी मन में…सी.एम्.शर्मा (बब्बू)…

लौ लगी कृष्णा तेरी मन में… सृष्टि दैदीप्य लगे कण कण में… मन पथिक हर राह निहारे… कान्हा आएंगे कौन से द्वारे… आँख न मीचे मन व्याकुल ये… अब …

छंद – त्रिभंगी – सी.एम्.शर्मा (बब्बू)…

विधा: छंद – त्रिभंगी – एक प्रयास…. (मेरी जानकारी में यह छंद सबसे कठिन छंदों की श्रेणी में आता है… ३२ मात्रिक छंद के चार चरणों में कहीं भी …

अबके बरस होली में-शिशिर मधुकर

अबके बरस होली में घोल नशा बोली में प्यार से बुला ले मुझे अंग तू लगा ले सजन रंग लगी चोली में कलियों पे भंवरे मचल रहे अरमान मेरे …

घाव तन्हाई का- शिशिर मधुकर

मुहब्बत का सुकूँ सबको कहाँ जीवन में मिलता हैं चमन पा लेने भर से तो ना उसमें फूल खिलता हैं उमंगे मर चुकी जिनकी और जहाँ जोश ठण्डा हो …