भंवर से कश्ती लगेगी किनारे कैसे?

‘ग़ज़ल’ को कौन रख सका है, पहरे में ‘अरुण’ पलक झपकते बदल लेते हैं रुख ‘रदीफ़-काफिये’ बया ने मुश्किलों से बनाया ‘घरौंदा’ अपना तूफां ने इक पल में उड़ा …

सपना – मधु तिवारी

💐सपना कभी अपना नहीं होता💐मधु तिवारी सपना कभी अपना नहीं होता सतपथ चल कुंदन सा तपना नहीं होता पथ पसंद सरल सभी को कठिन राह चलके खपना नहीं होता …

अफ़सोस न कर – डी के निवातिया

अफ़सोस न कर *** मेरे वतन के हिस्से ये सौगात हर बार मिली है ! कभी गूंगो की कभी बहरो की सरकार मिली है !! किसी में हुनर सुनने …

दर्द का दरिया-अरुण त्रिपाठी

*दर्द का दरिया निगलना है तुझे* बह्र 2122 2122 2122 212 सुन समन्दर, दर्द का दरिया निगलना है तुझे। खुद ब खुद तूफ़ान से लड़कर निकलना है तुझे। झेलना …

काहे भरमाये — डी के निवातिया

काहे भरमाये *** काहे भरमाये, बन्दे काहे भरमाये नवयुग का ये मेला है बस कुछ पल का खेला है आनी जानी दुनिया के रंग मंच पे नहीं तू अकेला …

कविता :– किसान कैसे तेरे हालात है, कवि :– अमन नैन

किसान कैसी तेरे हालात है रो रहा वर्तमान है सामने तेरे अंधकार है है शीत कैसा पड़ रहा वो थरथराता गात है है आधी अँधेरी रात तो भी किसान …

रात आती है – बिन्देश्वर प्रसाद शर्मा (बिन्दु)

रात आती है चली जाती है न जाने कौन सी रात आखरी होगी। ऐसे मिलते हैं बिछड़ जाते हैं न जाने कौन सी मुलाकात आखिरी होगी। गम होता है …

यशोदा तेरा ललन बड़ा निराला – डी के निवातिया

यशोदा तेरा ललन बड़ा निराला *** हलधर का भाई, नन्द का लाला, यशोदा तेरा ललन बड़ा निराला, बड़ा निराला, मैया बड़ा निराला, यशोदा तेरा ललन बड़ा निराला !! कमर …

उम्मीद है ये मुझको – शिशिर मधुकर

उम्मीद है ये मुझको इंतजार करोगे फिर से अपनी प्रीत का इकरार करोगे जो ना कह सके देख ज़माने को सामने तन्हाइयों में फिर से वो इजहार करोगे अधूरी …

मेरी कलम 8…….काजल सोनी

मुश्किल घड़ी में अपने बड़े याद आते हैं मगर कोई अपने आते नहीं……। इंसान की गलतियों में लोग सभी समझाते हैं मगर उसे समझते नहीं…….। किसी की हार में …

सजे सजाये ताज उतर जाते हैं…सी.एम्. शर्मा (बब्बू)…

मेरी तरह आप भी मुस्कुराया कीजिये…. दर्दे सागर हरदम न छलकाया कीजिये…. मुफलिसी भगाने का मजबूत इरादा रखो… हर किसी के आगे हाथ न फैलाया कीजिये… गर पाना है …

बिछुरन की रैना…-अरुण त्रिपाठी

*बिछुरन की ये रैना पिया..* (विरह गीत) बिछुरन की ये रैना पिया, कासों हो अब चैना पिया। तुम हौ रूठे निंदिया लूटे, अँसुअन की रसधार न टूटे। साथ न …

अहो जान अहो प्रीतम प्यारे

अहो जान अहो प्रीतम प्यारे मुझको हो तुम सबसे न्यारे चाँद में तो धब्बे बहुत सारे पर तुम हो आंखों के तारे अहो जान अहो प्रीतम प्यारे यू तो …

जमाना….. काजल सोनी

लोग डरते हैं जमाने से….. कि जमाना क्या कहेगा…. और अक्सर फैसले बदल दिया करते हैं….. जो फैसला नहीं बदलते….. वो आशिक कहे जाते हैं या पागल….. पर जमाना …

मुखिया जी – बिन्देश्वर प्रसाद शर्मा (बिन्दु)

मुखिया जी तनी कर दीं भलाई अपने अकेले ना खाईं मलाई। नाम होय जाई जब करवा तूं सेवा गरीब ई जनता के मिल जाइ मेवा भटकल बा ओकरा के …

|| कल को हम ना झाँक सके ||

जीवन का चौथापन आते ही, संध्या बेला ने डाला डेरा । बीते समय की स्मृतियों का, मन मानस में कसा घेरा ॥ 1 ॥ अनुभव स्मृतियाँ ही, जीवन की …

शब्द विवेचन- मेरा आईना- प्रेम

शब्द विवेचन – “प्रेम”   शब्द माला के “प” वर्ग के प्रथम और व्यंजन माला के इक्कीस वे अक्षर के साथ स्वर संयोजन के बना “अढाई अक्षर” का शब्द …