IBN…

युं ही बिकते रहें जमाने मे, कभी महफिल,कभी मयखाने में… पैमाने छलकते रहें,यादों को मिटाने मे, खो दियें खुद को ही “ऐ-जिन्दगी” तुझे भुलाने में… …इंदर भोले नाथ

कौन मेरे भीतर और मैं हूँ कौन…सी.एम्. शर्मा (बब्बू)…

मेरी आँखों की नींद चुरा कर… है मेरे सपने सजाता कौन…. चुरा के लाली वो अरुण की…. मेरी आँखों को है देता कौन…. जब होता दिल कभी बोझिल…. झोँका …

महोब्बत दे मुझे

खुद से मोहब्बत की इजाज़त दे मुझे, नहीं चाहता बहुत फकत इतना दे मुझे, एहतराम करू सर आँखों पे तेरी हर ख्वाहिश, तू समझे मुझे, खुदा इतनी नजाकत दे …

प्रेम दिवस

लो फिर आया ये प्रेम दिवस प्रदर्शन का अनोखा दिवस सच अगर प्रेम दिवस है ये, तो प्रदर्शन की क्या आवश्यकता अंतर्मन की नैससर्गिक भावना को किसी सहारे की …

कैसो फैशन आरओऐ

लल्ला मेरो जींस फटीभयी, महंगी कहकै लारओऐ मैया मेरी मत्था फोड़ै, कैसो फैशन आरओऐ बाल बनालए सिर्रिन जैसे, मौपे पोतलई लाली सी ख़ाली बस्ता कमर पै धल्लओ, ऐनक लैलई …

सभी मतलब के रिश्ते हैं – शिशिर मधुकर

तुम्हारे प्यार की खातिर अदावत मोल ली मैंने ग़मों की पोटली खुद के लिए ही खोल ली मैंने मुझे मालूम था ये आंधियां घर को उजाड़ेंगी ना जाने क्या …

महाशिवरात्रि – बिन्देश्वर प्रसाद शर्मा (बिन्दु)

फाल्गुन कृष्ण चतुर्दशी महाशिवरात्रि निष्ठापूर्वक अनुनय-विनय करने की एक रात की जग राता । चंद्र और सूर्य का योग परम धाम मोक्ष प्राप्त करने की अवधि। बहुत सारे दंतकथा …

*बेटी-युग*

*बेटी-युग* …आनन्द विश्वास सतयुग, त्रेता, द्वापर बीता, बीता कलयुग कब का, बेटी-युग  के  नए  दौर  में,  हर्षाया   हर   तबका। बेटी-युग में खुशी-खुशी है, पर महनत के साथ बसी है। …

प्यार के सारे तुम एहसास दे देना ,,,,,

लगाकर गले से मुझको सनम प्यार के सारे तुम एहसास दे देना गा उठें मेरे दिल की धड़कनें सभी साँसों को मेरी तुम साज़ दे देना लगाकर गले से …

वादा है ये फिर मोहब्बत न होगी ,,,,,,,

तेरी ख़्वाहिशों से जुदा मेरी हसरत न होगी , वादा है ये फिर मोहब्बत न होगी , सजायेगा तू जिस तरह से मुझे कभी उससे अलग मेरी रंगत न …

तेरे नाम – डी के निवातिया

तेरे नाम — सोचता हूँ एक ग़ज़ल तेरे नाम लिख दूँ राज़-ऐ-दिल मुहब्बत के तमाम लिख दूँ उठे गर नजरे तो रोशन ऐ आफताब कहे ज़रा झुके जो पलके, …

मैं रोज लगाता हूँ एक साँकल अपने ख्वाबों की दुनिया पर… फिर भी जाने कैसे किवाड़ खुले मिलते हैं… बेशक चरमराने की आवाज़ रोज होती है वाकिफ और कर देता हूँ बंद हर दरवाज़े …