ग़ज़ल – बिन्देश्वर प्रसाद शर्मा (बिन्दु)

दिल नहीं तोड़िये वजूद मिट जायेगा वजीर के पहले राजा पिट जायेगा। बदलते से दुनिया के जागीर हो तुम खामोश होकर दुनिया सिमट जायेगा। करना है अगर आपको अच्छा …

मुस्कुरा बोलना सीखे हम – अनु महेश्वरी

ज़िन्दगी उतनी भी कठिन नहीं है, जितनी मुश्किल हमने खड़ी की है| थोड़ा सा, अहंकार अपना करे कम, थोड़ा सा, मुस्कुरा बोलना सीखे हम| किसी से बराबरी, अगर न …

अभी उम्मीद बाकी है – शिशिर मधुकर

समझ में आ गया मुझको यहाँ ना कोई साकी है मिलेगी कोई तो हाला अभी उम्मीद बाकी है बिना रोके जिसमे पिस रहा है हर पल यहाँ इंसान ज़िन्दगी …

झंकार – मेरी शायरी……. बस तेरे लिए

झंकार दिल धड़कने लगता है बड़ी जोर से सुनके तेरी पायल की झंकार ……………… ज़रा आहिस्ता आहिस्ता चला करो कुछ वक़्त तो मिले बेकरार दिल को संभालने का ……………… …

ग़ज़ल – बिन्देश्वर प्रसाद शर्मा (बिन्दु)

उसे दर्द ने,कांटों पर सुला दिया ऐसा क्या उसको, जिंदा जला दिया। दर्द से पूछिये,दर्दे दिल की हाल बेइंतहा मुहब्बत,उसे भुला दिया। किनारा ढूंढने निकला था,वह भी कस्ती भंवर …

सफ़ा कोरा — डी के निवातिया

सफ़ा कोरा *** अंदर से ही नहीं बाहर से भी गोरा है दिल की किताब में जो सफ़ा कोरा है लिखना है उसपे फ़साना तेरे प्यार का रंगीन इश्क-ऐ-हर्फ …

कुछ लफ्ज़ 1. जिस्म का नही जनाब इस रूह का इम्तेहान लीजिए। आंखें ये फरेबी हैं,आप जज्बातों का तकाजा कीजिये।। 2.लफ़्ज़ों की इस हेरा फेरी में सच को झूठ …

एक ऐसा पाश है – शिशिर मधुकर

प्यार की मुद्दत से फक़त मुझको तलाश है खाली पड़ी सब झोलियां सूना आकाश है शक्ति जहाँ शिव को ही ना आधार दे सके सृष्टि वहां चलती नहीं और …

सरकार राजस्थान की

सरकार राजस्थान की,गजब ढो रही है. ले जाने के गर्त में,वो बीज बो रही है. महारानी ने फैलाया अब,मक्कारी का जाल है. रात -दिन उड़ाती वो,धन दौलत और माल …

दस्तक – मेरी शायरी……. बस तेरे लिए

दस्तक सीने में उठा है इक पुराना दर्द आज फिर से ………………… लगता है के दिल के दरवाजे पे मोहब्बत ने फिर से दस्तक दी है ……………….. शायर : …

मैं जिन्दा रहता हूँ

शीर्षक–मैं जिंदा रहता हूँ सूरज की पहली किरण जब रोशनदान से चेहरे पर पड़ती है मैं आँखे मीचते हुए बिस्तर से उठ जाता हूँ पिताजी के संग लॉन में …

झूठी शान – शिशिर मधुकर

चाहा बहुत मुझको मगर सच्चा प्रेम ना मिल सका ज़िंदगी सूनी रही और उल्फ़त का गुल ना खिल सका सोचा बहुत मैं दर्द अपना दूसरों से ना कहूं पीड़ा …

राह में कभी कभी – अनु महेश्वरी

राह में कभी कभी, ऐसे लोग मिल जाते है, अंजान होते हुए भी, हमे खुशियां दे जाते है| ऐसे लोगो से मिलकर, अक्सर यही लगता है, इंसानियत अभी भी, …

लफ्ज़ फिसलने लगे — डी के निवातिया

:””; लफ्ज़ फिसलने लगे ;””; +*””*.*””* + अधरों के पुष्प कँवल उनके खिलने लगे है ! लगता है सनम से अब वो मिलने लगे है !! कुछ तो असर …

प्रेम में मिलावट

प्रेम शुद्ध कांच सा निर्मल था जब पेहली बार बचपन और यौवन के बीच हुआ धीरे-धीरे,जैसे-जैसे प्रेम को समझने की कोशिश की प्रेम में मिलावट घुलता गया प्रेम मिलावटी …

मुस्कुराहटें

नहीं मुस्कुराहटों का कोई जवाब छिपें हैं इनमें हजा़रों राज़ चली आती हैं कभी नम आँखों के साथ कभी थम जाती हैं शर्मो हया के साथ चहक जाती हैं …

ख़बर – मेरी शायरी……. बस तेरे लिए

ख़बर ख़बर उसके आने की सुन कर …………………. दिल झूम उठा पागल हो कर पर इस नासमझ को कौन समझाये ……………………… के अभी तो उससे …. अपनी जान पहचान …