कोका कोला – बिन्देश्वर प्रसाद शर्मा (बिन्दु)

हाय रे तेरी कोका कोला ये पेप्सी की बोतल मिलती सब जगह है भैया रेस्तराँ कहो या होटल। कार्बोकृत पेय ठंढ़ी है भैया मतलब कोका कोला 350 ग्राम पेय …

पावन – मधु तिवारी

श्रीमती मधु तिवारी: 🌹 पावन🌹 …… मधु तिवारी पावन मेरा देश निराला, पवित्र सनातन यहां धर्म है। थोड़े अपवादों से मिलकर, पावन ही हमारा कर्म है। अहिंसा और …

तेरी मेरी कहानी …….

ये जो तेरी मेरी कहानी है लगने लगी पुरानी है जाने कहां गुम हैं वो रातें सिर्फ तेरी निशानी है क्यों दूरियां आ भी जाओ रात कैसी नूरानी है …

ये कैसा प्रेम है – शिशिर मधुकर

लगा कर दांव पर सब कुछ तेरा जीवन संवारा है ये कैसा प्रेम है जो मुझसे मिलन अब नागवारा है कमी मेरी भी है एक इंसान को भगवान कर …

केवल निगाहों में – शिशिर मधुकर

मुहब्बत बह रही है तेरे मेरे बीच राहों में चलो लेलें एक दूजे को अपनी पनाहों में ज़माने को बताएंगे नहीं अपना ये रिश्ता साझा करेंगे खुशी अब केवल …

खुशी जब दिल में होती है – शिशिर मधुकर

खुशी जब दिल में होती है नूर चेहरे पे आता है नशा उल्फ़त का महबूबा की आँखों में छाता है तुम्हारे रूप को देखा तो मन में ये ख्याल …

बहुत रंग देखे हैं दुनिया में हमनें – बिन्देश्वर प्रसाद शर्मा (बिन्दु)

बहुत रंग देखे हैं दुनिया में हमनें गिरगिट के जैसे इंसा हो गया है। कभी रंग गोरा कभी ये गेरुआ है कलियुग में कैसे केचुआ हो गया है। फर्ज …

गीत झूठे खुशहाली के – डी के निवातिया

गीत झूठे खुशहाली के *** ऐ राजनीति झूठे वादों पर मत जा बंद नयनो को ज़रा खोलकर देख ! आसमा छूने वाले धरा पर मति ला हकीकत को सच …

अबकी बार काहे मोदी सरकार.

झूठा तेरा वादा झूठा तेरा प्यार बोलो मोदी जी काहे बनायें फिर से तुम्हरी सरकार कहते हो खुद को चौकीदार फिर काहे नीरव मोदी हुआ फरार बताओ कहाँ गया …

इश्क़ की मंज़िल के हम अनुवाद हो गए…सी.एम्. शर्मा (बब्बू)…

नज़रों से हम तेरी तो आबाद हो गए…. थे रकीब मेरे जो सब बर्बाद हो गए… दिल रहे बेचैन तेरे दीद के लिए….. तुम न जाने ईद का क्यूँ …

खुशी मिलती है मुझको- शिशिर मधुकर

तेरी सूरत ही अब तो मेरे जीवन का सहारा है खुशी मिलती है मुझको इसे जब भी निहारा है भले तुम दूर रह कर के प्रीत अपनी जताती हो …

कुछ और सब्र कर लो – शिशिर मधुकर

कुछ और सब्र कर लो प्रीतम मैं पास तुम्हारे आऊंगी जिसको पाकर तुम हँस दोगे वो प्रेम सुधा बरसाउंगी मुझको भी एहसास है तुम मेरे बिन कितना तड़पे हो …

ये कैसा पुरुषार्थ निभाते हो..

क्या तुम पुरुष हो ? अगर हो,तो फिर ये कैसा पुरुषार्थ निभाते हो मुझसे ही जन्म लिया और मुझे ही रुलाते हो मेरे सीने से लगकर दूध भी पिया …

सम्पूर्ण सौर मंडल – बिन्देश्वर प्रसाद शर्मा (बिन्दु)

ग्रह – नक्षत्र, सम्पूर्ण सौर मंडल, अनन्त तारे ब्रम्हांड में धूल – कण, और भरे ये गैस सारे । आकाश गंगा, अनन्त – अथाह ये भुगोल है गुरुत्वाकर्षण का …

हिज़्र की आग- शिशिर मधुकर

मुझे मालूम है मैं तो तेरी सांसों में बसती हूँ यही वो राज़ है जिसको दबा मन में मैं हँसती हूँ मधुर संगीत वीणा का अधिक मीठा ही होता …

मन रुपी मानुष – डी के निवातिया

मन रुपी मानुष.. श्रावण छवि धारण कर ली, मन-मस्तिष्क के घुमड़ते मेघो ने, वर्षा होने लगी है अब, नयनो के समुन्द्र से अश्को की, ध्वंसावशेष के अवयव में, कुछ …

ना तुमने करी कोशिश- शिशिर मधुकर

जुदा होकर समय जो तुमसे मैंने तन्हा काटा है दर्द सीने में रक्खा है किसी के संग ना बाटा है तुम्हारी ढाल बन जिनसे मैंने महफूज़ रक्खा था उन्होंने …

मुझे अंदाज न था – शिशिर मधुकर

मुहब्बत कैसे होती है ये मैंने तुमको सिखलाया तुम्हें पाकर मेरा मन देख लो कितना इठलाया मुझे अंदाज न था इस छुपी ताकत का जज्बे में तुम जैसे पत्थर …

ठीक नहीं – डी के निवातिया

ठीक नहीं *** बात दिल की दिल में छुपाना ठीक नहीं ! फ़ासले अपनों के बीच बनाना ठीक नहीं ! जिंदगी में रक्खो अपने काम से काम यारो ! …