सियासतदार – डी के निवातिया

सियासतदार — सियासतदार सब बेशुमार बदजुबानी उतर गए छोड़के मझदार में खुद दूसरी राह से गुज़र गए ऐतबार कोई करे भी तो कैसे करे बेईमानो का लगाके आग शहर …

चुनाव और उम्मीदें

इस लम्बी सी कतार में लगी हैं मीलों लम्बी उम्मीदें, कुछ हैं बिजली-पानी सी, कुछ सर पर छत सी उम्मीदें… हर शख्स है चुपचाप खड़ा, पर नज़रें बातें करती …

अनमोल आभूषण – शिशिर मधुकर

अगर मैं बात करती हूँ जुबां पे नाम आता है हसीं चेहरा तेरा हर पल मेरे दिल में समाता है दूरियां देख लो इस प्यार में थोड़ी जरूरी हैं …

क्या तुम जानती हो..

क्या तुम जानती हो.. तुम्हारे लिए आज भी मेरा प्रेम जीवंत है और तुम्हारे प्रेम का एहसास आज भी मेरे मन को टटोलता है क्या तुम जानती हो.. तुम्हारा …

गंवारा नहीं – डी के निवातिया

गंवारा नहीं *** जाज़िब आब-ए-आईना है हम, कोई आवारा नहीं, हुस्न करे नज़रअंदाज़ कोई ये हमको गंवारा नहीं । मिल गए है ख़ाक में हूर-ऐ-जन्नत जाने कितने, लेकर अपनी …

आँसू छंद “कल और आज”

भारत तू कहलाता था, सोने की चिड़िया जग में। तुझको दे पद जग-गुरु का, सब पड़ते तेरे पग में। बल पे विपुल ज्ञान के ही, जग पर शासन फैलाया। …

अहीर छंद “प्रदूषण”

अहीर छंद “प्रदूषण” बढ़ा प्रदूषण जोर। इसका कहीं न छोर।। संकट ये अति घोर। मचा चतुर्दिक शोर।। यह दावानल आग। हम सब पर यह दाग।। जाओ मानव जाग। छोड़ो …

अधूरे से सपने – शिशिर मधुकर

मुझको गले से लगा लो ना अपने तभी होंगे पूरे अधूरे से सपने खुद को भुला के ही ईश्वर मिलेगा लगते हो तुम तो बस नाम जपने लोगों को …

छुप-छुप के – डी के निवातिया

छुप-छुप के *** ये जो छुप-छुप के नज़रे मिलाई जा रही है, जरूर कोई नई साज़िश रचाई जा रही है ! ! ये इश्क का मसला भी सियासत सा …

पवन – डी० के० निवातिया

हे पवन ! तू है बड़ी चंचल री, छेड़ जाती है, अधखिले पुष्पों को…! है जो चिरनिंद्रा में लीन, सुस्ताते हुए डाल पर, तेरे गुजरने के बाद विचलित हो …

काज पांच साल का:-विजय

दे रहा हिसाब तुमको मैं आज पांच साल किया है जो हमने काज कौशल विकास का रथ दौड़ाया हर हुनर को हमने पंख लगाया स्टार्ट-अप स्टैंड-अप हमारा मिशन दे …

आँखों से प्याले – शिशिर मधुकर

मुझे तुम पिला दो न आँखों से प्याले गले से उतरते नहीं अब निवाले बड़ी सूनी सूनी है महफ़िल हमारी तुम ही नहीं जब कैसे उजाले सहा जितना मुमकिन …

प्रकृति की पूजा – शिशिर मधुकर

प्रकृति की पूजा है जो लोग करते निशां उनके देखो हरगिज ना मरते जमीं देखो पेड़ो को साधे हुए है तभी फूल इसके आंचल में झरते समा लेगी सबको …