कल्पना – डी के निवातिया

आऒ जानें ….कल्पना क्या है ……….!! *** प्रत्यक्षानात्मक अनुभवों की ये कुँजी है बिंबों और सृजन विचारों की ये पूँजी है विचारणात्मक स्तर की रचनात्मकता ‘कल्पना’ नियोजन पक्ष की …

भाईचारा – बिन्देश्वर प्रसाद शर्मा – बिन्दु

समझो क्या है भाई चारा बिन इसके है कहाँ गुजारा। बिन मेल कुछ कहाँ है संभव साथ मिले तो दिखे किनारा। हर प्रयास में संग जरूरी है सफल जब …

शातिर – डी के निवातिया

शातिर *** वो देखो, वो जो भोला सा शख्श है ये मत पूछो वो कितना शातिर है, बात न पूछो उसकी हद-ऐ-शराफत की गरीबी का बाज़ार सजाना जानता है …

तुम्हारी अदा – डी के निवातिया

तुम्हारी अदा *** इतना प्यार करते हो, कभी न जताते हो तुम यदा कदा ही सही मगर, बहुत सताते हो तुम कैसे न जां निशार करे हम तुम्हारी अदाओ …

मुझसे जीया नहीं जाता – शिशिर मधुकर

तेरे बिन इस ज़माने में मुझसे जीया नहीं जाता ज़हर का घूंट तन्हाई का भी ये पीया नहीं जाता लाख चाहा मगर ये घाव दिल के रिसते जाते हैं …

कोई कारण तो होता है -शिशिर मधुकर

कोई भी सोच मेरी तो परे तुझ से ना जाती है मुहब्बत कौन सा रंग अब मुझे आके दिखाती है अधिकतर ज़िन्दगी गुजरी मगर तन्हा रहा हूँ मैं मिलन …

आईना तुम ज़रा देखो – शिशिर मधुकर

मुहब्बत कर तो ली तुमने मगर अब पैर खींचे हैं दर्द इतना हुआ सोचो आँख हम अब भी मींचे हैं आईना तुम ज़रा देखो खिली सूरत जो दिखती है …

हलचल – बिन्देश्वर प्रसाद शर्मा – बिन्दु

सुरमई आँखों में काजल क्या बात है गली में हो रही हलचल क्या बात है। उनकी नाज वो नखरे जान ले लेगी हो जायेंगे कत्ल कितने क्या बात है …

ज़लवा – डी के निवातिया

ज़लवा *** जरुरी नहीं दुनियाँ में सिर्फ हुस्न का ज़लवा हो हमने तो कीचड़ के हिस्से में कमल को देखा है अभद्र हो या दीन-दरिद्र कद्र हर शै: की …

वक्ती खेल – शिशिर मधुकर

आज हम गैर लगते हैं कभी पर थे तुम्हें प्यारे कोई शिकवा नहीं तुमसे ये वक्ती खेल हैं सारे खुदा ने दिल दिया है तो इसमें जज्बात होते हैं …

मेरी तकदीर हो तुम – शिशिर मधुकर

मेरी ग़ज़लों ने अब ये सच ज़माने को बताया है मुहब्बत में किसी अपने ने मेरा दिल दुखाया है कितने अशआर कह डाले मगर ग़म तो नही छूटे किसी …

कैसे कह दूँ – डी के निवातिया

कैसे कह दूँ *** *** *** कैसे कह दूँ उसको मै बेवफा, नब्ज चलती है हर पल मेरी उसके नाम पर ! कभी मुलाकात नही हुई तो क्या, मेरे …

छंद – (कुण्डलियाँ) – बिन्देश्वर प्रसाद शर्मा – बिन्दु

नहीं चाहिये प्रीत अब, नहीं चाहिये मीत इज्जत अपनी बेचकर, नहीं चाहिये जीत। नहीं चाहिये जीत, दुनिया अंधी हो गयी कैसे यह सब रीत , इतनी गंदी हो गयी। …

कोई बंधन नहीं टूटा – शिशिर मधुकर

लाख कोशिश करी रिश्ता मगर मैं तोड़ ना पाया तुम्हें घुट कर तड़पने को अकेला छोड़ ना पाया हवाएं कुछ चली ऐसीं तिनका तिनका बिखेरा है घरोँदा उड़ गया …

अधूरापन मेरा – शिशिर मधुकर

अधूरापन मेरा अब तो मुझे परेशान करता है तेरा बदला रवैया हरदम मुझे हैरान करता है एक बुरे वक्त में हमने कई साझा किए थे दुख यही सब सोच …

कहानी छोड़ जायेंगे – डी के निवातिया

कहानी छोड़ जायेंगे *** *** *** मिटाओगे कहाँ तक मेरी यादें, हर मोड़ पर लफ्जों की वीरानी छोड़ जायेंगे l कैसे बीतेगी तुम्हारी सुबह-शाम, हम सिसकती रातों की कहानी …

लिख नहीं पाता हूँ – डी के निवातिया

लिख नहीं पाता हूँ *** लिखना चाहता हूँ पर लिख नहीं पाता हूँ आँखों के सामने तैरते कुछ ख्वाब, कुछ अनकहे अल्फ़ाज़ आते है क्षण भर के लिए फिर …

साफ़ सुथरा कचरा और जीने के लिए मरने की लाचारी

साफ़ सुथरा कचरा और जीने के लिए मरने की लाचारी ख़ूबसूरत कपड़े, शानदार सहायक, साफ़ सुथरा कचरा, ये सब सफाई कर्मचारियों को मिल जाए तो.. गलतफहमी में न रहिये, …

गैर हम हो नहीं सकते – शिशिर मधुकर

कोई परदा नहीं जब बीच गैर हम हो नहीं सकते किसी और की बाहों में अब तुम सो नहीं सकते बड़ी मुश्किल से मिलती हैं दौलतें प्रेम की जग …

भाग्य ना कोई बांच सका है – शिशिर मधुकर

वक्त की ज़द में कुछ भी हो तुम फिर भी रहना पड़ता है तेरे बिन इस तन्हाई का ग़म मुझको भी सहना पड़ता है कितना भी कोई संयम रख …

कौन ढलना चाहे – डी के निवातिया

कौन ढलना चाहे ********** है भला कौन मुसाफिर राह में जो संग चलना चाहे हर कोई चाहे नया रंग , मेरे रंग कौन ढलना चाहे !! हर किसी को …

जो मन आपस में मिल जाएँ – शिशिर मधुकर

जो मन आपस में मिल जाएँ जुदा वो हो नहीं पाते जो मिल के भी नहीं मिलते वो तन्हा सो नहीं पाते अनोखा सा जो रिश्ता है दर्द ए …