ज़िन्दगी – अनु महेश्वरी

ज़िन्दगी भी कितनी अजीब है, एक ही परिस्थिति, किसी के लिए, खुशियां है लाती, किसी को केवल, गम है दे जाती| कोई यहाँ, गम को भी, अपने, मुस्कराहट के …

इंतज़ाम करो — D. K Nivatiya

इंतज़ाम करो *** विकास का दम भरते हो, कुछ जनता के भी काम करो निश दिन रेल होती डी-रेल,  इसका भी इंतज़ाम करो कितनी जिंदगियां बे-मौत चढ़ जाती है …

मरने दो — डी के निवातिया

मरने दो *** *** *** रेल पटरी से जनता की उतरी है, उतरने दो। हादसे होते है तो लोग भी मरते है, मरने दो। हम देश चलाते है हवाई …

बहुत बेशर्म है या ज़िद्दी

वो लड़का जो कभी किताबों से मोहब्बत करता था सुना है, आजकल मोहब्बत में किताबें लिख रहा हैं पहले रास्ते की किसी सड़क के किसी मोड़ पर या शहर …

विरह – प्रियंका ‘अलका’

बादल सूना धरा है प्यासी घूँट- घूँट तेरा प्रेम पीया जो बन गई तेरी दासी बन गई तेरी दासी……. आग की लपटें धधके जैसे विरह की ज्वाला फैले वैसे.. …

चुप्पी – प्रियंका ‘अलका’

तुमने हर बार मेरी बातों को अनसुना किया और अपने विचारों में लीन रहे….. क्या तुम्हें मालूम है हर बार तुम मुझे खोते गए और मैं खुद में खोती …

तब अकेला था मैं जिंदगी में , अब अकेले में रहने लगा – मनुराज वार्ष्णेय

जिसको मैंने सोचा कभी न , काम वो भी मैं करने लगा तब अकेला था मैं जिंदगी में , अब अकेले में रहने लगा जब से तू आयी है …

धुंधली ना हो तस्वीर-शिशिर मधुकर

धुंधली ना हो तस्वीर तू रंग इसके उभार दे नज़रों के पास आ ज़रा किस्मत संवार दे सूखी हैं सभी डालियाँ बरसी है ऐसी आग सावन की फुहारों को …

नज़्म – तुम ही बोलो ….सी.एम्.शर्मा (बब्बू)….

आज फिर तुमने, दिल मेरे पे, दस्तक दी है…. मेरे बालों में, तेरी उँगलियों ने, हरकत की है… एक सिहरन सी, बदन मेरे में, लहराई है…… ठहरे पानी में …

गुरु वन्दना – मनुराज वार्ष्णेय

नमामि गुरुदेव तुमको समर्पण मेरा जो जीवन है तुमको ही अर्पण तुमने जीवन का पाठ पढ़ाया तुम्ही ने बुलंदी पे चढ़ना सिखाया तुमसे ही जीवन का चिराग जला है …

नटखट ललन — डी के निवातिया

 नटखट ललन (“सरसी छंद”) ठुमक ठुमक चलते सावरिया, पग पग कदम बढ़ाय छन छन से छनकते  घुंघरू,  मधुर सी धुन सुनाय यशोदा दर खड़ी इतराती, नटखट ललन लुभाय देवलोक से  …

दोहे – बिन्देश्वर प्रसाद शर्मा ( बिन्दु )

सत् से संगत कीजिये रहै न मन में क्लेश ऐसी वाणी बोलिये मन को लगै न ठेस। मंदिर मस्जिद सब करै मन में मन का फेर धरम करम का …

सब उसके हैं खेल…सी.एम्. शर्मा (बब्बू)..

II छंद – सरसी  II चितचोर माखनचोर है वो, गिरिधर ही गोपाल I रणछोड़ कहो गोकुल ग्वाला,कह डारो नँदलाल II नाम पुकारो कुछ भी उसका,सब उसके हैं खेल I …