व्यर्थ ना जाने देगे कुर्बानी-Bhawana kumari

आज कोई शब्द नहीं,कोई भाव नहीं, ना चल रही क़लम मेरी आज, नि:शब्द हो मेरी कलम आज, बस इतना ही लिख रही हर बार लेखनी आज, ना भूल पाऐगे …

आगोश

तुम आगोश में आ जाओ तुम्हें दिल में बसा लूँगा नैनों के रास्ते से तुम्हें झील में उतार लूँगा   झूमेंगे हम दोनों पानी तुम्पे उछालूँगा मोहब्बत की डोरी …

पीड़ा की लहरें – शिशिर मधुकर

शहीदों की चिताओं पर उठी पीड़ा के लहरें हैं मगर सोचो ज़रा हम ही तो असली अंधे बहरे है सोचते रहते हैं एक दिन शेर भी घास खाएगा जेहादी …

“जागो भाग्य विधाताओं”

“जागो भाग्य विधाताओं” देखा अजब तमाशा, छायी दिल में निराशा, चार गीदड़ ले गये, मूँछ तेरी नोच के। सोये हुए शेर तुम, भूतकाल में हो गुम, पुरखों पे नाचते …

प्रतिशोध

कब तक पठानकोट,कब तक उरी कब तक सहेंगे पुलवामा अब तो जागो हे पुरूषोत्तम करो आतंकरूपी रावण का खात्मा भाता नही अब छोटी सर्जरी न भाता अब कोई वार्ता …

वैलेंटाइन-डे – डी के निवातिया

वैलेंटाइन-डे *** देशी चमड़ी को विदेशी पहरन से सजाते है, प्रेम नाम पर पार्को होटलो में रंग जमाते है, सरेआम अश्लील फूहड़ता का नंगा नाच कर, आ चल हम …

ईश्वर सद्गुणों के संग्रह है, सद्गुण अपनाये बिना पूजा व्यर्थ है – जीवन दर्शन

ईश्वर सद्गुणों के संग्रह है ! संग्रह को अपनाया ही नही तो ईश्वर खुश नही होने वाले !! न घंटा बजाने से न कीर्तन करने से और न ही …

चलो प्यार करें

तुमसे  चेहरे  का आईना लिये उल्फत  अपनी  गुलजार  करें इक  दूजे   से  खुल  जायें  तो दिल  बातों  का   बाजार  करें जो  दबी  हुई  दिल  के भीतर होठों  से   अब  …

पास हो तुम – शिशिर मधुकर

पास हो तुम दिल के इतने कैसे मैं तुमको छोड़ दूँ जिसमें हैं बस छवियां तेरी वो आईना क्यों तोड़ दूँ अविरल धार स्नेह की जो बहती है जानिब …

” गुलिस्ताँ ” (साहित्य की फुलवारी )

साहित्य प्रेमियों के लिए ख़ुशी की बात है की साहित्य समूह के कुछ सदस्यों ने एक साथ मिलकर एक पुस्तक ” गुलिस्ताँ ” (साहित्य की फुलवारी ) का सफल …

गीत बनाकर हर गम को मैं गा लूँगा — भूपेन्द्र कुमार दवे

गीत बनाकर हर गम को मैं गा लूँगा तार-तार दिल में भी मैं स्वर सजा लूँगा। तू नफरत भी ना कर पावेगा मुझसे प्यार के हर बोल से तुझे …