अंजाम-ए-वफ़ा – अजय कुमार मल्लाह

हमको तो अंजाम-ए-वफ़ा ख़ूब है मालूम। हम इश्क़ निगाहों में अब पलने नहीं देंगे।। एवज़ में मोहब्बत के लोग देते हैं कज़ा। परवाने को फ़ानूस में जलने नहीं देंगे।। …

मैं दीप हूँ मुझे रोशन रखो —- भूपेन्द्र कुमार दवे

मैं दीप हूँ मुझे रोशन रखो अपने करीब उजाला मन रखो।   जलने बुझने का खेल अजब है जिन्दगी को इसी में मगन रखो।   दुआ होती है बूँद …

मैं किसान कहलाता हूँ

शीर्षक- मै किसान कहलाता हूँ मै आग उगलते आसमान की ही छाया में उम्मीद सैंकड़ो लेकर बैल चलाता हूँ हाँ, मैं किसान कहलाता हूँ ; ये बेमौसम बरसात सहीं …

अंतिम यात्रा, भाग -१

अंतिम यात्रा किसी की चूड़ियाँ टूटेंगी, कुछ की उम्मीदे मुझसे विदा लेगी रूह जब मुस्करा कर मुझसे कितनी बार बुलाने पर भी जो रिश्ते नहीं आये दौड़ते चले आएंगे वो …

ऐ जिंदगी — डी. के. निवातिया

ऐ जिंदगी बहुतो को तरसाया तूने बहुतो को रुलाया है बड़ी मशरूफ और मगरूर है तू ऐ जिंदगी न जाने कितनो का दिल तूने दुखाया है जरा ये भी …

भक्ति मेरी है, शक्ति तेरी

भक्ति  मेरी है,  शक्ति तेरी फिर क्यूँ मैं तुझको बिसराऊँ तृप्ति-सिन्धु  है  मंदिर  तेरा फिर क्यूँ मैं प्यासा रह जाऊँ?   मुझको  भूल गया  फिर भी तेरा  साया  मैं   …

इक बार तो मेरी बात पर भी विश्वास करो

इक बार तो मेरी बात पर भी विश्वास करो हर इक दिल में खुदा है इसका अहसास करो।   इनसे ही घोंसला मेरा घर भी आबाद है ये चिड़ियाँ …

कुछ लिखकर, कुछ मिटा दिया करता हूँ…

कुछ लिखकर, कुछ मिटा दिया करता हूँ बिना वजह, कलम चला दिया करता हूँ लिख जाती है अक्सर,दिल में दबी बाते सारी जो खुद में रख खुदी भुला दिया …

खुदा जितना सिमरते थे – शिशिर मधुकर

तुमसे मिलने की खातिर ही तो हम इतना संवरते थे जाने मन जान लो हम तुम से प्यार कितना करते थे तुम्हारे मुस्कुराते चेहरे का जब हसी दीदार होता …

मंगल नववर्ष मनाएँगे

गाँव-गाँव में शहर-शहर में, कैसी छायी उजियाली है; खेतों में अब नव अंकुर , नव बूंद से छायेगी हरियाली है | बहुत कुहासा बीत चुका अंतर्मन का ठिठोर मिटा, …

मेरा- मेरा सब कहे – डी. के. निवातिया

कुण्डलिया ******************* मेरा- मेरा सब कहे , मैं  में  खोया देश ! दोष राखे सब दुसरे ,  लूटे भर के  भेष !! लूटे भर के  भेष, समझ कोई  ना …