उठ गया

जाने क्यों कायनात से,भरोसा अपना उठ गया लगता है हमदर्द कोई, हमसे कहीं तो रुठ गया बांधा था बड़ी मुश्किल से नेह डोर को जिनसे पता चला न कौन …

जुर्म—डी के निवातिया

वो करते सवाल तो जवाब हम देते हर जुर्म अपने सर आँखों पर लेते कम से कम गुनाह तो बताया होता फिर चाहे सजा-ऐ-मौत क्यों न देते।। ! ! ! …

नज़रों से मुहब्बत – शिशिर मधुकर

हूक सी उठती है तू जब भी मेरे पास होता है नज़रों से मुहब्बत का मजा तो खास होता है तुझे देखती हूँ जब भी ये दो निगाहें बचा …

मन मेरा इत उत भागे रे….सी. एम्. शर्मा (बब्बू)…

मन मेरा इत उत भागे रे…. उड़ जाए बदली बन कभी… कभी चाँद सा झांके रे…. जंगल में सबने क़ानून बनाया… दुश्मन भी जिसने दोस्त बनाया… बिल्ली मौसी के …

ग़ज़ल- कब से मेरा तडपे हैं दिल-मनिन्दर सिंह “मनी”

कब से मेरा तडपे हैं दिल । अाकर मुझ को साजन तू मिल ।। यादों में तेरी खोया मैं । दिल में मेरे तू बस कर खिल ।। दीवाना …

एहसास-ऐ-गैर — डी के निवातिया

मुहब्बत के नाम का पाठ वो दिन रात रटता है। जरा सा छेड़ दो तो ज्वालामुखी सा फटता है।। क्या हालात हो गये आज दोस्ताना-ऐ-जहाँ के जिसे मानो अपना …

अरमां – शिशिर मधुकर

मुहब्बत पास है जिनके उनके चेहरे चमकते हैं अँधेरी रात में अरमां भी जुगनुओ से दमकते हैं लाख कोशिश करे दुनियाँ रूहों को सताने की प्रेम किश्ती में बैठे …

खुशबू सी-शिशिर मधुकर

तन्हाई में तुम जब भी कहीं जाओगे मेरी छवियों को सीने में दबा पाओगे जो बसती थी खुशबू सी तेरी साँसों में कैसे आखिर उसे पूरी तरह भुलाओगे शिशिर …

हमारे नेता—डी के निवातिया

विकास की डोर थाम ली है हमारे नेताओ ने । अब नये शमशान और कब्रिस्तान बनायेंगे।। कही भूल न जाओ तुम लोग मजहब की बाते याद रखना इंसानियत को …

बेफिक्र सा – शिशिर मधुकर

तुम मुस्काते हो तो मुझको पता चल जाता है मेरा ख़याल अकेले में अब भी तुम्हे सताता है लाख कोशिश करूँ मैं बेफिक्र सा दिखाने की तेरी चाहत का …

गुब्बारों का लगा है मेला

गुब्बारों का लगा है मेला। एक रुपए में ले लो जैसा। लाल,गुलाबी,नीला,पीला। पैसे लेकर दौड़ी शीला। माँग लिया गुब्बारा नीला। इधर से डोला- उधर से डोला। श्यामू,चिंटू,सीता,लीला। खेल सभी …

हे मातृभूमि! तेरी ख़ातिर

हे मातृभूमि! तेरी ख़ातिर,             लेकर यह अभियान चले। अपनी जान हथेली पर हम,             तुझ पर होने बलिदान चले। हम घट-घट के वासी हैं,             जो भी नज़र …

मांझी—डी. के. निवातिया

लड़ाई गर मुद्दे पर हो तो लड़ने में मजा आता है उलझकर उलझनों में जीने का आनद आता है चिकनी सडको पर रफ़्तार आजमा लेते है सभी तूफानी लहरो …

शायरी-2 पियुष राज

हुस्न के पीछे भाग रही दुनिया बेनूर चेहरे पर अब फूल नही खिलते दिल तो एक जैसा है सबका,फिर भी सच्चे मोहब्बत करने वालों को दिल के किराएदार नहीँ …

शायरी-1 -पियुष राज

हम तारीख देखकर मोहब्बत का इज़हार नहीँ करते.. हम हसीन चेहरा देखकर प्यार नही करते… हम तो फ़िदा है उनकी मासूमियत पर…. वरना हम यूँ ही अपना दिल किसी …