-दोहे- लिखने का प्रथम प्रयास

“ऐसे क्रोध संभालिए, जो गागर में नीर। कटु वचन मत बोलिए, चुभे ह्रदय में तीर।।” “जाकी छवि निहारन सो, मिले ह्रदय का चैन। वाको सम्मुख राखिए, दिन हो चाहे …

जीवन्त मूरत – शिशिर मधुकर

तुमसे कैसे कहूँ तुम मेरी कितनी ज़रूरत हो मुझे सुख चैन देने वाली एक भोली सूरत हो हर अंग में जिसके छवि दिखती है बस मेरी प्रेम के रंगो …

नालों में बहते हैं – शिशिर मधुकर

फूल जो खुशबू देते हैं अक्सर कांटों में रहते है सच्चे इंसा भी ज़माने में बस कष्टों को सहते हैं वक्त जब साथ ना दे तो आखिर क्या करे …

हिन्द धरा—डी के निवातिया

ये हिन्द धरा है शेरो की मत इस पर तुम प्रहार करो ये पावन धरा है देवो की इसे शीश झुका प्रणाम करो !! ये देखो हिन्द हिमालय से …

“अरूणाभा-एक बेटी के प्रति पिता का हृदय”

वह सुन्दर सी, कोमल हाथों में जब मेरे आयी पुलकित हुआ हृदय मेरा जब देखा चेहरे पर लालिमा छायी । प्यारा सा सुस्मित चेहरा लग रहा हो जैसे चन्द्रानन …

नाम जब चाहा – शिशिर मधुकर

मैंने नाम जब चाहा तो फिर मैं प्यार को भूला नफे नुकसान की बातों में बस मन मेरा झूला बड़े महलों में भी अक्सर अकेले लोग रहते हैं जिसने …

कामयाबी का सूत्र – मनुराज वार्ष्णेय

ईश्वर की आराधना में बहुत शक्ति होती है माँ बाप की सेवा ही सच्ची भक्ति होती है दुनिया के बन्धनों में फँसकर कुछ नही मिलता भवपार आकर के ही …

“दुआ मागूँगा तुम्हारे लिए रब से ,तुम मुस्कराना प्रिये!”

मैं जागूँगा अब से रातों में तुम सो जाना प्रिये! दुआ मागूँगा तुम्हारे लिए रब से ,तुम मुस्कराना प्रिये!! न कुछ कहूंगा तुमसे ,न कोई शिकायत है मेरी , …

हाँ !दिल ए जान से प्यार ,मुझसे करते हो तुम।

जुवां की भाषा निरर्थक रही ,दिल की जुवां को समझते हो तुम। वीरानियों में घिरुं मैं जब भी , प्रेम की बारिश से बर्षते हो तुम। लड़खड़ाते हो ,गिरते …

वटवृक्ष………!—-ऋतुराज

आज याद आती है- पिताजी की वो बातें थकान और तनावग्रस्त आकर लंबी सांसे ले बिस्तर पर ऐसे बैठना जैसे- किसी परिंदे को मिला हो अपना बिछड़ा परिवार सुकून …

तुम आना ज़रूर…सी.एम्. शर्मा (बब्बू)….

तुम लौट कर नहीं आये…. सांसें आ जा रही थी… प्राण नहीं आये…. तुम लौट कर नहीं आये….. शरीर निर्जीव हो गया है मेरा… प्राण हैं की इंतज़ार में…. …

बिटिया : मेरी संजीवनी

मैं सात समुन्दर पार हु रहता हर पल जल थल छू के कहता नेत्र बांध करुणा के बल से क्षतिग्रस्त हु उस धरातल पे झरोखे मैं आकर बिटिया पुकारे …

यह रचना “बेटियाँ” प्रतियोगिता में सम्मलित की गयी है।

“माँ मैने क्या कसूर किया” नामक शीर्षक से प्रकाशित मेरे द्वारा रचित रचना http://sahityapedia.com प्रतियोगिता में शामिल है |अतः आपसे अनुरोध है | यदि आपको मेरी रचना पसंद आये …

प्रेम शांति और सामंजस्य

प्रेम शांति और सामंजस्य अपना लो फिर अमन का चिराग जलालो जो बीज नफरतो के बो गए वो अब सास्वत ही सो गए बृक्ष काँटों के हटा कर एक फूलो …

“Poetry on Picture” contest के अंतर्गत सम्मिलित मेरी रचना “कचरेवाली” अगर आपको पसंद आए और आप उसे दूसरे लोगों से Share करने योग्य समझें तो दी गयी लिंक पर जाकर Share करें. विजेता Number of Facebook Shares के आधार पर चुना जाएगा.

20-01-2017 की  सन्ध्या ६ बजे तक किए गए Shares ही  गिने जाएंगे. “कचरेवाली”