मुहाब्बत

आज कल मुहाब्बत बदनाम हो गया हैं चर्चा गली मुहल्ले सरेआम हो गया हैैैै बन गया है शौदा कुछ पाने की है चाहत क्योकी जिस्म आशिकोका मुकाम हो गया …

नूर – मेरी शायरी……. बस तेरे लिए

नूर लाखों चिराग जलाये थे हमने राहों पर तेरे आने की खबर सुनकर पर सारा आलम फ़ीका हो गया तेरे चेहरे के नूर से सर्वजीत सिंह sarvajitg@gmail.com

मुखौटा

सब कहते हैं ख़ुशी होती है तुम्हारी मुस्कुुराहट को देखकर, दिल उत्साहित होता है चेहरे से झलकती खुशियों की आहट को देखकर, हमने ना कहा उनसे, वक़्त के तजुर्बे …

निश्छल प्रेम – बिन्देश्वर प्रसाद शर्मा – बिन्दु

जहाँ निश्छल प्रेम सदा रहता जहाँ उज्ज्वल दीप सदा जलता। उस परिपाटी का क्या कहना सदियों की रीत जहाँ फलती।। यहाँ वर्णित है संस्कारों का यह भुगोल है उपकारों …

दोहे – बिन्देश्वर प्रसाद शर्मा – बिन्दु

सत्य सनातन मधु वचन, जो सब रखते साथ खुशियाँ वो पाते सदा, रखते जिस पर हाथ। संतन की सेवा करो, उन पर रख कर ध्यान गली – गली ठग …

दोहा ग़ज़ल – बिन्देश्वर प्रसाद शर्मा – बिन्दु

दोहा ग़ज़ल जगमग – जगमग दीप का , आया यह त्योहार खुशियाँ सब को भा गईं, करते सब मिल प्यार। राम चन्द्र भगवान का, हुआ आगमन आज गुजर बरस …

हादसा – मेरी शायरी……. बस तेरे लिए

हादसा महोब्बत की राह पर चलना शुरू किया तो पता लगा के बहुत टेढ़े मेढ़े हैं रास्ते जिसे देखकर समझ आया के सावधानी हटी तो दुर्घटना घटी और दुर्घटना …

आंखें नम नही करता

क्या करूँ  दिनभर, मन  नही  लगता वो  तुम्हारा  फोन,  अब  नही  लगता ….. ख्वाब अब  तो सारे, मर  से गये  है दिल  अपनी बात, अब नही  करता ….. मंदिर …

भंवर – मेरी शायरी……. बस तेरे लिए

भंवर अपने प्यार की नैया के खेवैया तो हमीं थे फिर दोष दें किसको ……………….. के हमें डूबो दिया मोहब्बत के भंवर में ……………………. सर्वजीत सिंह sarvajitg@gmail.com

जुदाई तुमको भाती है – शिशिर मधुकर

ये कैसा प्रेम है, मुझको नहीं तुम, याद करते हो मैं कैसे मान लूँ, तुम मेरी छवि, सीने में धरते हो दर्द तुमको अगर होता, तो चेहरे से, बयां …

“तु आगे बढता चल…”

कर तु हालात से मुकाबला चाहे हो कितनी भी बला तु आगे बढता चल-तु आगे बढता चल… बांधे सीमा तुझको गर रुकना ना कभी भी हारकर तु दौडता चल-तु …

अन-गिनत फूल मोहब्बत के चढ़ाता जाऊँ-सलीम रज़ा रीवा

अन-गिनत फूल मोहब्बत के चढ़ाता जाऊँ आख़िरी बार गले तुझ को लगाता जाऊँ oo जाने इस शहर में फिर लौट के कब आऊँगा पर ये वादा है तुझे भूल …

रात तन्हाई की – शिशिर मधुकर

चाह फूलों की थी मुझको, मगर कांटों ने घेरा है नज़ारा कौन सा कुदरत ने देखो,आखिर, उकेरा है मुहब्बत की चाह रखना, गुनाह कोई नहीं होता मगर इस वक्त …

ग़ज़ल – बिन्देश्वर प्रसाद शर्मा – बिन्दु

अपने मखमली ख्वाब , ये ख्याल छोड़ दो उनके जिगर में उतरने का मलाल छोड़ दो। कोशिशें तेरी, सारे नापाक हो जायेंगे अपनी हरकतें ये बेरूखी चाल छोड़ दो …

ग़ज़ल – बिन्देश्वर प्रसाद शर्मा – बिन्दु

मुझे बेच दो दूसरे के हाथ , ये मंजूर नहीं मैं झुका हुआ जरूर हूँ, इतना मजबूर नहीं। मुझे मेरे हाल पर यूँ, तड़पने के लिए छोड़ दो मुझे …