नेतागिरी के अड्डे – शिशिर मधुकर

मुंबई की मोटर साइकिल सवार गड्डे में फिसल गई दिल्ली के अनिल गुप्ता की जान नाले में निकल गई नगर निगमों की लापरवाही पर जनता बहुत नाराज़ है खुलकर …

मौलीक अधिकार – अनु महेश्वरी

अपने अधिकारो में फंसे हम ऐसे, सामने वाले का अधिकार भूल बैठे, किसी बात पे, शर्म नहीं आती, आज हमे, सारी बाते, लगती मौलीक अधिकार, हमे| बेमतलब की वहस …

साथ — डी के निवातिया

साथ अक्सर जब टहलता हूँ अकेले अकेले बांधे अपने दोनों हाथ कभी उगते सूरज को निहारने की आस में सुबह सुबह, कभी सूनी सूनी मुझको घेरे रात बातो ही …

‘चक दे चक दे इंडिया’

इतिहास रचा था 1983 में जिस लॉर्डस के मैदान में आज वहीं उतरी है बेटियां, बात वही है ध्‍यान में महिला क्रिकेट विश्‍वकप के पहले मैच में इंग्‍लैण्‍ड को धोया …

वक़्त

​ठहरजाता है वक़्त, थम जाता है वक़्त, वक़्त की मिज़ाज़ क्या? हार जाते है सब। ज़रा देखो, जरा सोचो! निर्जिव जो,भागे तेज़ जरा सोचो, जरा देखो! खुली किताब, पढी …

दोस्त – अरूण कुमार झा बिट्टू

बच्चपन के दोस्त कही जब मिल जाते हैं। दिल मे दबे भाव भी लव पे खिल जाते हैं। गम्भीरता बातो से जाने कहा जाती हैं। बच्पन की बातो मे …

सेना सदा महान है – शिशिर मधुकर

सेना सदा महान है उससे ही हिन्दुस्तान है लेकिन हमारी कमज़ोरियों से बढ़ती ना उसकी शान है जब भी कोई सैनिक अपना शहीद होता है हर नागरिक का मन …

तेरी चाहतों के जैसा – शिशिर मधुकर

चाहा बहुत ना दिल से तुझे दूर कर सके भूलूँ तुम्हें ना वो मुझे मजबूर कर सके आनंद वो मैंने पा लिया जिसकी तलाश थी बाकी नशे ना मुझको …

बेटियों, से ज़िन्दगी होती है – अनु महेश्वरी

समय कब पंख लगा उड़ गया, कितना कुछ अब है बदल गया, जिसे अंगुल पकड़, मैंने चलना सिखाया था, आज वह चलते वक़्त, मेरा हाथ थाम लेती है, जिस …

ये कैसा प्यार – प्यार और सम्मान किसी तारिक विशेष के मोहताज नही !!

आज स्कूल,कालेजो में बहुत अच्छा प्यार देखने को मिल रहा है 😓 ! लड़का-लड़की कॉलेज के पास खोके के दुकान में सिगरेट,दारू और न जाने कौन सी नशीली पदार्थ का सेवन …

नींदवाली स्वप्न

नींदवाली स्वप्न ——————- रात की नींद में स्वप्न देखती है लड़की हंसती है निश्चिंत होकर खुशी से जाती है और दौड़ती रहती है रंगीन तितलियों के पीछे पंक्षी बनकर …

एक भावपूर्ण कहानी – मृत्यु का कारण बनी लापरवाह और नासमझी !!

रक्षा-बंधन आने वाली थी इसीलिए मुन्नी के माता-पिता ने अपने बुआ-फूफा के यहाँ जाने का प्लान बनाया ! पर मुन्नी के पापा को व्यापार से सम्बंधित कुछ जरुरी काम …

गूंजी किलकारी

मेरे घर आंगन में गूंजी किलकारी आई इस बगिया में नव कलिका प्यारी प्रतीक्षा में जिसके बरस भए सुनने को जिसे कान तरस गए खिली कली बगिया महकी देख …

रोमांच — डी के निवातिया

रोमांच बदन संगमरमर है या तराशा हुआ टुकड़ा कांच सा शबनम की बूँद ढले तो लगे है तपता कनक आंच सा नजर है की उसके उत्कृष्ट बदन पर ठहरती …