मेरे ख्वाब कभी जो पास तुम्हारे आते- आशीष अवस्थी

मेरे ख्वाब कभी जो पास तुम्हारे आते चुपके से उनको तुम अपने पास सुलाते धूप शहर की तेज बहोत थी फिर भी हम बच जाते गर तुम गगरी में …

आधुनिक होने के चक्कर में – अनु महेश्वरी

बदला बदला सा, सब कुछ है, बदला रहनसहन, बदली भाषा, बदल गए अब रिश्ते और नाते, आधुनिक होने के चक्कर में| माँ बन गई है अब मम्मी और, बाबूजी …

आस – शिशिर मधुकर

हवाएं नहीं चलती तेरी खुशबू हो जिनके पास बहारे फिर से आएँगी नहीं देता है कोई आस साँसें चल रही हैं यूँ तो जिम्मेदारी निभाने को चाहत बिना ये …

बस राज़ है इतना – शिशिर मधुकर

मुझे अपनी मुहब्बत पे सुनो जी नाज़ है इतना बनाया जिसने जानेमन हसी तुम्हें आज है इतना दीवाना हसीनॉ का तो मैं पहले भी होता था मगर तुमको सराहे …

ख़ुश्बू प्यार की….सी.एम्.शर्मा (बब्बू)….

रिश्तों में प्यार की सचाई तुम क्या जानों… कैसे होती दिल से बात तुम क्या जानों…. रहते हो तुम जो ज़मीं से सदा ही ऊपर… कैसी होती सोंधी ख़ुश्बू …

तुम्हारा साथ – शिशिर मधुकर

तुम्हारे साथ में हर दिन आसानी से कट जाता है सुख दुःख जीवन के सब सहने में मज़ा आता है मतलबी रिश्तों के लिए मगर संग मैंने छोड़ दिया …

फूलों से सजाऊँगा – शिशिर मधुकर

आईना देखो तो मैं तुमको नज़र आऊँगा बिजलियां प्यार की तेरे हुस्न पे गिराऊँगा भले ना बात करो तुम ज़माने भर से डरो तेरे ख्वाबों में मैं झुक कर …

देश के लाल फना हो जाते है — डी. के. निवातिया

देश के लाल फना हो जाते है *** पुराने जख्म भरते नहीं की नये फिर से मिल जाते है सेनापतियों की गैरत पे जाने क्यों ताले पड़ जाते है …

फ़कीर हो गया हूँ तेरे जाने के बाद – आशीष अवस्थी

तेरे साथ रहता था मैं बादशाहों की तरह। फ़कीर हो गया हूँ तेरे जाने के बाद।   रात भर जागता रहा ख्वाबों की तलाश में। नींद आयी भी मुझे …