कुदरत का करिश्मा – शिशिर मधुकर

मैं जानती हूँ तुम बस मुझे देखना चाहते हो कैसे कहूँ तुम भी तो मेरे ख्वाबों में आते हो अचरज नहीं बात ये कुदरत का करिश्मा है हर पल …

मेरी मजबूरी – शिशिर मधुकर

भूली नहीं हूँ तुमको पर जानो मेरी मजबूरी मैं बस तुमको चाहती हूँ कहना नहीं ज़रूरी मैं तेरी दो बाहों में अब चाहे ना सिमट पाऊँ रूहों के बीच …

महादेव—डी के निवातिया

ज   पाप पुण्य के युद्ध में जो खुद को मिटाता है। त्याग कर अमृत हलाहल विष अपनाता है। निस्वार्थ लोकहित में जीवन अर्पण कर दे। वो स्वयंशंभू, नीलकंठ, …

उठ गया

जाने क्यों कायनात से,भरोसा अपना उठ गया लगता है हमदर्द कोई, हमसे कहीं तो रुठ गया बांधा था बड़ी मुश्किल से नेह डोर को जिनसे पता चला न कौन …

जुर्म—डी के निवातिया

वो करते सवाल तो जवाब हम देते हर जुर्म अपने सर आँखों पर लेते कम से कम गुनाह तो बताया होता फिर चाहे सजा-ऐ-मौत क्यों न देते।। ! ! ! …

नज़रों से मुहब्बत – शिशिर मधुकर

हूक सी उठती है तू जब भी मेरे पास होता है नज़रों से मुहब्बत का मजा तो खास होता है तुझे देखती हूँ जब भी ये दो निगाहें बचा …

मन मेरा इत उत भागे रे….सी. एम्. शर्मा (बब्बू)…

मन मेरा इत उत भागे रे…. उड़ जाए बदली बन कभी… कभी चाँद सा झांके रे…. जंगल में सबने क़ानून बनाया… दुश्मन भी जिसने दोस्त बनाया… बिल्ली मौसी के …

ग़ज़ल- कब से मेरा तडपे हैं दिल-मनिन्दर सिंह “मनी”

कब से मेरा तडपे हैं दिल । अाकर मुझ को साजन तू मिल ।। यादों में तेरी खोया मैं । दिल में मेरे तू बस कर खिल ।। दीवाना …

एहसास-ऐ-गैर — डी के निवातिया

मुहब्बत के नाम का पाठ वो दिन रात रटता है। जरा सा छेड़ दो तो ज्वालामुखी सा फटता है।। क्या हालात हो गये आज दोस्ताना-ऐ-जहाँ के जिसे मानो अपना …

अरमां – शिशिर मधुकर

मुहब्बत पास है जिनके उनके चेहरे चमकते हैं अँधेरी रात में अरमां भी जुगनुओ से दमकते हैं लाख कोशिश करे दुनियाँ रूहों को सताने की प्रेम किश्ती में बैठे …

खुशबू सी-शिशिर मधुकर

तन्हाई में तुम जब भी कहीं जाओगे मेरी छवियों को सीने में दबा पाओगे जो बसती थी खुशबू सी तेरी साँसों में कैसे आखिर उसे पूरी तरह भुलाओगे शिशिर …

हमारे नेता—डी के निवातिया

विकास की डोर थाम ली है हमारे नेताओ ने । अब नये शमशान और कब्रिस्तान बनायेंगे।। कही भूल न जाओ तुम लोग मजहब की बाते याद रखना इंसानियत को …