ये एहसान तेरा है – शिशिर मधुकर

कहाँ जाएं मिलें किस से बड़ी मुश्किल ने घेरा है मुझे अपनों नें क्या लूटा कोई दिखता ना मेरा है मुझे रिश्तों में जकडा है मगर ना प्यार बरसाया …

मर्यादा पुरुषोत्तम राम – डी के निवातिया

मर्यादा पुरुषोत्तम राम *** मेरे रोम रोम में बसने वाले राम तुमने सुधारें सबके बिगड़े काम साक्षात् मर्यादा के तुम हो रक्षक तुम से सुबह मेरी तुम से शाम …

मिला ना वो मगर अब तक – शिशिर मधुकर

मुहब्बत जिस को होती है वो तो नज़दीक आता है खुद की हस्ती को साथी के लिए जड़ से मिटाता है जो रिश्ता निभाता है फ़कत एक आस के …

सैलाब की नीयत – शिशिर मधुकर

मैं तन्हा हूँ राह साथी की जाने कब से तकता हूँ फना होती हैं उम्मीदें ग़म का मारा सा थकता हूँ मेरी आँखों में आंसू तो नज़र ना आएंगे …

मृदुल वाणी – बिन्देश्वर प्रसाद शर्मा – बिन्दु

उनके मुख मृदुल वाणी से रस अमृत सुधा बरसता है उनके प्रखर मुख मंडल से ऐसे ये भाल चमकता है। ज्ञान पराग की तुमड़ी से केसर का चूर्ण छलकता …

पाहन – बिन्देश्वर प्रसाद शर्मा – बिन्दु

पाहन में विश्वास है इतना, मत पूछो मेरे यार धर्म संस्कृति इसी से चलती, मत पूछो मेरे यार। इस देश का माटी चंदन, जहाँ अमृत गंगा जल है जगह …

अमर गाथा – बिन्देश्वर प्रसाद शर्मा – बिन्दु

जिसने गीता कुरआन लिखा है रामायण का गुणगान लिखा है। बाइबिल – गुरुग्रंथ इतना प्यारा कृष्ण लीला रसखान लिखा है। डूबे तुलसी बाल्मीकि डूबे भक्त हरि का सम्मान लिखा …

टूटने की भी सीमा है – शिशिर मधुकर

मन की बात खुलकर के जहाँ पे कह नहीं सकते ऐसे हालातों में इंसान कभी खुश रह नहीं सकते तेरे नज़दीक आते हैं तो फ़कत रुसवा ही होते हैं …

अगर दिल खूबसूरत है – शिशिर मधुकर

अगर दिल खूबसूरत है नज़र चेहरे पे आता है कोई मुखड़ा मुझे हरदम तभी इतना लुभाता है मुहब्बत वो नहीं समझा उम्र गुजरी है पर सारी साथ एक ऐसे …

कोई तो बताये वो कैसे यहाँ आया था

कोई तो बताये वो कैसे यहाँ आया था मेरा मुकद्दर सहसा बदलने यहाँ आया था। कितना खामोश, तन्हा, उदास दिख रहा है वो ना मालूम किस-किससे मिलके यहाँ आया …

मंजर – बिन्देश्वर प्रसाद शर्मा (बिन्दु)

लुत्फ़ – ए-रवानी का अब सिलसिला देखिये इस बाग – ए – चमन में फूल इक खिला देखिये। है कितनी दिलकश, नहकतों वाली मंजर अब्रे बहार, इनकी शिकवा न …

उसी उदास शाम की राह तकते हुए

थकी हुई उदास शाम, रोज की तरह, फिर आई है मेरे साथ वक्त बिताने, मैं सोचता हूँ उसे कोई नया तोहफा दे दूं, मुस्कराने की कोई वजह दे दूं, …

अभी उम्मीद बाकी है – शिशिर मधुकर

वो मेरे साथ रहता है मगर फिर भी ना मेरा है फ़कत तन्हाइयों नें ज़िन्दगी में मुझको घेरा है बड़ी लम्बी हुईं है रात इस जीवन के मेले की …

कातिल ये बहरे हैं – शिशिर मधुकर

भुला दो तुम मुझे चारों तरफ़ बैरी के पहरे हैं रोशनी अब नहीं दिखती अंधेरे इतने गहरे हैं संभालो मत ना उठने दो तूफां को समुन्दर में लील जाएंगे …

माँ — मधु तिवारी

💐माँ 💐 …. मधु तिवारी माँ तेरी ममता का, मोल नहीं है। इससे ज्यादा कुछ,अनमोल नहीं है। कोख से जनम दिया,अमृत पिलाया है एक-एक निवाला, तूने खिलाया है तेरे …

मैं अपने ब्लॉगस्पॉट वेबसाइट को और बेहतर कैसे बना सकता हूँ ?

सर्वप्रथम ये प्रश्न एक कौरियन मित्र प्रवीण मारुकोलू द्वारा क्योरा पर पूछा गया ! जिसको हिंदी में बताने का मेरा मन किया ! अब आते है मूल प्रश्न के उत्तर पर …

मिलन – विदाई…सी.एम्.शर्मा (बब्बू)…

छत पे कोआ कांव कांव कर रहा है…. कोई और तो अपना है नहीं…शायद… तुम आ रही हो कहीं… मिलोगी मुझसे तो बताऊंगा तुझे… जीना कितना दुश्वार था तेरे …