अबकी बार काहे मोदी सरकार.

झूठा तेरा वादा झूठा तेरा प्यार बोलो मोदी जी काहे बनायें फिर से तुम्हरी सरकार कहते हो खुद को चौकीदार फिर काहे नीरव मोदी हुआ फरार बताओ कहाँ गया …

इश्क़ की मंज़िल के हम अनुवाद हो गए…सी.एम्. शर्मा (बब्बू)…

नज़रों से हम तेरी तो आबाद हो गए…. थे रकीब मेरे जो सब बर्बाद हो गए… दिल रहे बेचैन तेरे दीद के लिए….. तुम न जाने ईद का क्यूँ …

खुशी मिलती है मुझको- शिशिर मधुकर

तेरी सूरत ही अब तो मेरे जीवन का सहारा है खुशी मिलती है मुझको इसे जब भी निहारा है भले तुम दूर रह कर के प्रीत अपनी जताती हो …

कुछ और सब्र कर लो – शिशिर मधुकर

कुछ और सब्र कर लो प्रीतम मैं पास तुम्हारे आऊंगी जिसको पाकर तुम हँस दोगे वो प्रेम सुधा बरसाउंगी मुझको भी एहसास है तुम मेरे बिन कितना तड़पे हो …

ये कैसा पुरुषार्थ निभाते हो..

क्या तुम पुरुष हो ? अगर हो,तो फिर ये कैसा पुरुषार्थ निभाते हो मुझसे ही जन्म लिया और मुझे ही रुलाते हो मेरे सीने से लगकर दूध भी पिया …

सम्पूर्ण सौर मंडल – बिन्देश्वर प्रसाद शर्मा (बिन्दु)

ग्रह – नक्षत्र, सम्पूर्ण सौर मंडल, अनन्त तारे ब्रम्हांड में धूल – कण, और भरे ये गैस सारे । आकाश गंगा, अनन्त – अथाह ये भुगोल है गुरुत्वाकर्षण का …

हिज़्र की आग- शिशिर मधुकर

मुझे मालूम है मैं तो तेरी सांसों में बसती हूँ यही वो राज़ है जिसको दबा मन में मैं हँसती हूँ मधुर संगीत वीणा का अधिक मीठा ही होता …

मन रुपी मानुष – डी के निवातिया

मन रुपी मानुष.. श्रावण छवि धारण कर ली, मन-मस्तिष्क के घुमड़ते मेघो ने, वर्षा होने लगी है अब, नयनो के समुन्द्र से अश्को की, ध्वंसावशेष के अवयव में, कुछ …

ना तुमने करी कोशिश- शिशिर मधुकर

जुदा होकर समय जो तुमसे मैंने तन्हा काटा है दर्द सीने में रक्खा है किसी के संग ना बाटा है तुम्हारी ढाल बन जिनसे मैंने महफूज़ रक्खा था उन्होंने …

मुझे अंदाज न था – शिशिर मधुकर

मुहब्बत कैसे होती है ये मैंने तुमको सिखलाया तुम्हें पाकर मेरा मन देख लो कितना इठलाया मुझे अंदाज न था इस छुपी ताकत का जज्बे में तुम जैसे पत्थर …

ठीक नहीं – डी के निवातिया

ठीक नहीं *** बात दिल की दिल में छुपाना ठीक नहीं ! फ़ासले अपनों के बीच बनाना ठीक नहीं ! जिंदगी में रक्खो अपने काम से काम यारो ! …

वाह रे बापू – बिन्देश्वर प्रसाद शर्मा – (बिन्दु)

कोई इनको गांधी तो कोई मन रखने को बापू कहता है देश व्यापी सड़यंत्र में कोई इनको ऐसे डाकू कहता है। वाह रे नेहरू वाह रे गांधी राजनीति में …

फक़त वो साथ है तेरा- शिशिर मधुकर

मुझे खुशियां जो देता है फक़त वो साथ है तेरा जिसे पकडूं तो गुल खिलते हैं वो बस हाथ है तेरा जिसे चूमूँ सुकूं मिलता है मुझको रूह के …

ख़ुश-हाल, ख़ुश-हाली—संकलनकर्ता: महावीर उत्तरांचली

((1.) इक दिया नाम का ख़ुश–हाली के उस के जलते ही ये मालूम हुआ —कैफ़ी आज़मी (2.) ना–शनास–ए–रू–ए–ख़ुश–हाली है तब–ए–ग़म–नसीब जब मसर्रत सामने आई झिजक कर रह गई —साक़िब …

मेरे दिल क्यूँ मचलता है-शिशिर मधुकर

मेरे दिल क्यूँ मचलता है तुझे तन्हा ही चलना है आग अपने लगाते हैं तो फिर जलना ही जलना है हिम से खुद को ढके देखो वो पर्वत मुस्कुराता …

आज का बचपन

आधुनिकता का परिधान पहने है आज का बचपन, महँगे खिलौनों में सिमट गया है आज का बचपन, खुले आसमान के नीचे खेलने का रिवाज नहीं अब, इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों में …