कुछ खास होता है – शिशिर मधुकर

शर्म और हया जब किसी से दूर होती है दिल में चाहत उस समय भरपूर होती है कुछ खास होता है इस आनंद में मितरो इसके नशे में दुनियाँ …

दे कलम को धार — ग़ज़ल-नज्म — डी. के. निवातियाँ

दे कलम को धार अब तलवार बनाना होगा ! भर लफ्जो की हुंकार हथियार बनाना होगा !! जब बात बने ना मान मुनव्वल से, जान लो अपने डंडे की …

मन…कुण्डलिया छंद..सी.एम्. शर्मा (बब्बू)…..

मन गोरी का महकता, कमर मटके नाहीं…. राख गगरी सर उसने, कमर लियो मटकाए…. कमर लियो मटकाए, सब ससुरा पागल भयो… होश बिसरि देखि जो, घरवाली ने धर लियो…. …

आशा-2…सी.एम्. शर्मा (बब्बू)..

आशा….. ज़िन्दगी में कितनी ज़रूरी है… प्राण हैं ये…. बिना इसके जीवन निरर्थक सा है… मृत्यूतुल्य…… जैसे कुछ है ही नहीं सब कुछ होते हुए भी…. बीमार शरीर तो …

सम्पूर्ण कर जाओ – शिशिर मधुकर

तन्हा बैठा हूँ ख्वाबों में अब तुम भी चले आओ अपने पैरों की आहट से तार मन के खनकाओ तुम आते हो मेरा चेहरा खुशियों से दमकता हैं अँधेरों …

एक खबर ………….

एक खबर …………. नोटबंदी का दिखा असरदार असर…………… सबसे ईमानदार और सम्मान जनक संस्था के रूप में देखे जाने वाले “बैंक” के कर्मीयो को भी मिला अवसर, खूब दिखा …

मुफ्त ज्ञान—मुक्तक —डी. के. निवातिया

ना जाने किस डगर पे चल पड़ा इंसान बात बात पर दे रहा मौत का फरमान क्या सत्य-असत्य,क्या अच्छा या बुरा , सब ताक पे रख बाँट रहा मुफ्त …

खत

मन की गहराइयों से यादों की पुरवाइयों में ठहरे हुए वक़्त की अनकटी तन्हाइयों में कोरे कागज़ पर दफ़न ख्वाबों की स्याही से बंद लिफाफे में पड़ा है उनकी …

अफ़सोस ——डी. के. निवातिया

लुटाकर हर ख़ुशी उम्र भर रो सकता हूँ मैं एक सिर्फ तुझे हँसाने के लिये , अश्को के सागर में खुद को बहा सकता हूँ मैं तेरे कपोलो के …

गुलशन गुलज़ार से – शिशिर मधुकर

तेरी यादों का ताज महल सींचा हैं प्यार से मुझको सुकून मिलता हैं बस तेरे दीदार से लाख हँसी दिखते हैं इन लम्बी सी राहों में मन झूमा जो …

आशा-1…सी. एम्. शर्मा (बब्बू)…

आशा….. हम में ही निहित है…जन्म से… प्रकिर्ति में निहित है हमारे चारों तरफ… यत पिण्डे तत ब्रह्मांडे… जो भीतर है वही तो बाहर है…. रोज़ ही फूल पौधे …

आस्था

तुम मानते नहीं भगवान को यह है तुम्हारा करम मैं मानती हूं ईश्वर को यह है मेरा धरम बोलने की आज़ादी दी होगी संगविधान ने तुमको चोट करने का …

शब्दों में मैंने बाँधा है,,,,

अपने प्यार में तुमने साजन मुझको ऐसे बाँधा है, झरते हैं भाव हृदय से तेरे शब्दों में मैंने बाँधा है,,,,, जब भी दर्पण की ओर निहारूँ प्रेम से तेरे …